डिंडोरी /शैलेश नामदेव /खबर डिजिटल/ डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड मुख्यालय में संचालित शासकीय आदिवासी उत्कृष्ट सीनियर बालक छात्रावास एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। तहसीलदार शैलेष गौर द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में छात्रावास से 60 से अधिक छात्र अनुपस्थित पाए गए, जिससे व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। निरीक्षण के समय छात्रावास के अधीक्षक बीएस टेकाम की गैरमौजूदगी ने हालात को और गंभीर बना दिया।
छात्रों ने खुलकर बताई समस्या
निरीक्षण के दौरान मौजूद छात्रों ने खुलकर अपनी समस्याएं बताईं। छात्रों का कहना है कि उन्हें नियमित रूप से भरपेट भोजन नहीं मिलता, और जो भोजन परोसा जाता है उसकी गुणवत्ता बेहद खराब होती है। कई बार तो भोजन खाने योग्य भी नहीं रहता, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती।
छात्रावास में पढ़ाई और सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। जहां उत्कृष्ट छात्रावास में बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और अनुशासित व्यवस्था होनी चाहिए, वहांअनियमितता और लापरवाही साफ नजर आई। निरीक्षण के दौरान सामने आई यह स्थिति जनजातीय कार्य विभाग की निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करती है।
तहसीलदार ने स्थिति को बताया गंभीर
तहसीलदार शैलेष गौर ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली और आवश्यक जांच एवं कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय लोगों, अभिभावकों ने जताई नाराजगी
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि जब मुख्यालय स्थित उत्कृष्ट छात्रावास की यह हालत है, तो दूर-दराज के इलाकों में संचालित छात्रावासों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार आदिवासी और गरीब तबके के छात्रों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य देने के बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई उजागर कर रही है। अब देखना यह होगा कि यह कार्रवाई केवल कागज़ों तक सीमित रहती है या वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर ठोस कार्रवाई होती है, ताकि छात्रावासों में पढ़ रहे बच्चों को उनका हक और सुरक्षित माहौल मिल सके।


