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Friday, April 17, 2026
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Big Breaking: अब कौन उठाएगा किसानों के मुद्दे… भारतीय किसान संघ का महा- इस्तीफा

पूरी कार्यकारिणी ने भेजा इस्तीफा

डिंडोरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ डिंडोरी जिले से बड़ी खबर आ रही है जिसमें शासन प्रशासन से लेकर किसान संगठनों के मुख्यालय तक हलचल तेज कर दी है। जो संगठन कल तक किसानों के हक के लिए अपना तन मन और धन अभी तक लगाता रहा, आज उसी की जिला इकाई ने व्यवस्था से परेशान होकर एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है, भारतीय किसान संघ की पूरी जिला कार्यकारिणी ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। किसानों के हर मुद्दों को लेकर सड़क पर संघर्ष करने वाली भारतीय किसान संघ अब अपने आपको लाचार महसूस कर रही हैं।

किसानों की समस्याओं को ठंडे बस्ते में डाला
पदाधिकारी ने आरोप लगाया है कि 29 दिसंबर 2025 से शाहपुरा के रानी दुर्गावती स्टेडियम में अनिश्चितकालीन आंदोलन किया गया था जिसके चलते हम लोगों ने 29 प्रमुख मांगे, जबलपुर संभाग के आयुक्त को सौंपी थी। लेकिन अभी तक शासन द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की गई। किसान संघ का कहना है कि हम लोगों के द्वारा गांव-गांव जाकर समितियां बनाने और रात दिन मेहनत करने के बावजूद प्रशासन ने किसानों की समस्याओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जिला पदाधिकारी का कहना है किसानों के हितों के लिए हमने लगातार संघर्ष करते हुए विषम परिस्थितियों में भी कार्य किया है, और कार्यकर्ताओं ने व्यक्तिगत स्तर पर समय और संसाधन लगाया लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। प्रशासन की ओर से उचित पहल नहीं होने के कारण कार्यकर्ताओं में घोर निराशा व्याप्त हो गई।

प्रांतीय पदाधिकारियों को भेजा इस्तीफा
किसान संघ के जिला अध्यक्ष बिहारीलाल साहू और जिला मंत्री निर्मल कुमार साहू के हस्ताक्षर से सामूहिक इस्तीफा का पत्र संगठन के प्रांतीय पदाधिकारियों को भेजा गया है। इस सामूहिक इस्तीफा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि अब डिंडौरी जिले के किसानों की आवाज कौन उठायेगा। प्रांतीय पदाधिकारी के पास इस्तीफा पहुंच चुका है। अब देखना यह होगा कि वे उसे स्वीकार करते हैं या जिला कार्यकारिणी को समझा बूझाकर दोबारा उन्हें सक्रिय करते हैं। फिलहाल तो मुआवजा और सिंचाई जैसे ज्वलंत मुद्दों पर अब पैरवी करने वाला कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आ रहा है। यह सामूहिक इस्तीफा विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। क्योंकि सत्ता पक्ष पर किसानों की अनदेखी के आरोप और गहरे हो गए हैं।

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