डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी जिले के ग्रामीण अंचलों में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। ताजा मामला जिला मुख्यालय से लगे ग्राम देवरा का सामने आया है, जहां लंबे समय से पेयजल समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों का आक्रोश मंगलवार को फूट पड़ा। लगभग 2.50 करोड की लागत से नलजल योजना पर 4 साल से कार्य चल रहा है फिर भी पानी पानी के लिए मोहताज़ ग्राम वासियों को पीने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा हैं। जल जीवन मिशन के तहत गांव में नल-जल योजना का लाभ नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने देवरा-मुड़की तिराहा पर खाली बर्तन लेकर धरना प्रदर्शन किया। और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ग्रामीणों का आरोप है कि उनके गांव में बड़ी मुश्किल से दो तीन दिन में पानी आता है।पूर्व उप सरपंच रंजीत कटारे ने मंत्री को बताया कि करोड़ों रूपये की टंकी निर्माण और पाईप लाईन विस्तार योजना देवरा ग्राम पंचायत के लिए थी किन्तु टंकी का निर्माण डांड विदयपुर गांव की सीमा में करवा दिया गया है जो देवरा से एक किलोमीटर दूर है ।पीएचई विभाग द्वारा देवरा गांव के लिए प्रस्तावित पानी की टंकी को दूसरे स्थान पर बनवा दिया गया, जिसके कारण गांव में पाइपलाइन बिछने के बावजूद पानी की सप्लाई नियमित रूप से शुरू नहीं हो सकी। वर्षों से समस्या झेल रहे ग्रामीणों ने कहा कि कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हुआ, जिससे मजबूर होकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल रहे। मौके पर पहुंचे पीएचई विभाग के ठेकेदार सुरेंद्र ओझा ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति तब बिगड़ गई जब ग्रामीणों और ठेकेदार के बीच तीखी बहस हो गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार द्वारा उनसे अभद्रता और गाली-गलौज की गई।
सूचना मिलते ही एसडीएम डिंडोरी रामबाबू देवांगन मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण पीएचई विभाग की मंत्री संपतिया उइके को बुलाने की मांग पर अड़े रहे। मंत्री सम्पतिया उइके ने ग्रामीणों को निराश नही किया और उनकी समस्या सुनी,मंत्री ने ठेकेदार सुरेंद्र ओझा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए।
ग्रामीणों के अनुसार वे सुबह 9 बजे से लगभग दो घंटे तक चक्का जाम कर धरने पर बैठे रहे। इस दौरान सड़क पर बस, ट्रक, दोपहिया और चारपहिया वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे यात्रियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह घटना जिले में जल संकट और प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर तस्वीर पेश कर रही है।
