Monday, November 2, 2026
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मुजफ्फरपुर डूबा: सड़कें बनी दरिया, कई इलाके जलमग्न, निगम के दावे फेल

मुजफ्फरपुर/खबर डिजिटल/अजीत रेनू / जिले में लगातार हो रही बारिश से जहां किसानों के चेहरे खिल गए हैं। वही जनता के लिए बारिश बड़ी भारी परेशानी का सबब बन गई है। बारिश में पूरा मुजफ्फरपुर शहर पानी-पानी हो गया है। शहर की सभी सड़कें कीचड़मय हो गई हैं। इस बारिश ने नगर-निगम के दावे की पोल खोल दी है। इतना ही नहीं मॉडल तथा सदर अस्पताल से लेकर समाहरणालय नगर थाना सहित अन्य सरकारी दफ्तर झील में तब्दील हो गया है। शहर की हृदय स्थली कल्याणी चौक के पास भी जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

सदर अस्पताल में घुसा पानी

लोग पानी में घुसकर आने-जाने को विवश दिखे। इस दौरान लोग नगर निगम को भी कोस रहे थे। नगर निगम तो बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जिले में हो रही बारिश ने ही नगर निगम की बोलती बंद कर दी है। नगर थाना रोड, तिलक मैदान, बनारस बैंक चौक, जेल रोड, गोला रोड एवं स्टेशन रोड सहित शहर की तमाम सड़कों पर लोगों का चलना मुश्किल हो रहा है। अगर सदर अस्पताल की बात करें तो ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक मरीज और उनके परिजन पानी में घुसकर आते-जाते दिखे।

नगर निगम लापरवाह

उधर, सदर अस्पताल काफी पुराना है और सड़क से काफी नीचे है। जिसके कारण जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। हालांकि, कुछ दिन पहले जलजमाव से राहत के लिए सदर अस्पताल में सीवरेज का काम कराया गया था। बना हुआ नाला उसमें हुए जलजमाव से निजात दिलाने में सफल नहीं हो रहा। सवाल तो ये है कि पूरा सिस्टम है मुजफ्फरपुर में चौपट है। पानी निकासी की जगह नहीं है। जिसके कारण जनता को आवागमन करने में भी काफी परेशानी होता है। जलजमाव की स्थिति जानने के लिए नगर आयुक्त शहर में निकले। पानी निकालने की प्रक्रिया शुरू है। स्मार्ट सिटी मुजफ्फरपुर पानी में तैर रहा है। नगर निगम के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

मॉडल अस्पताल में बारिश का पानी ऑपरेशन थिएटर तक पहुंचा

मरीजों को बेहतर सुविधा देने के नाम पर 29 करोड़ रुपये खर्च कर बने मॉडल अस्पताल की असलियत शुक्रवार की बारिश में सामने आ गई। तेज बारिश का पानी सीधे ऑपरेशन थिएटर तक घुस गया। इससे ऑपरेशन के लिए आए मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी और अस्पताल की तमाम व्यवस्थाएं धराशायी हो गईं।कर्मचारियों के मुताबिक, छत पर जमा बारिश का पानी बेसिन के पाइप के जरिए OT में टपकने लगा। आनन-फानन में कर्मचारियों ने पानी निकालने और लाखों के अत्याधुनिक उपकरणों को बचाने की कोशिश की। लगातार गंदा पानी आने से उपकरणों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। पानी भरने की वजह से एक दर्जन मरीजों को ड्रेसिंग के लिए इमरजेंसी में शिफ्ट करना पड़ा, जिससे मरीजों में आक्रोश फैल गया।

ठेकेदार और BMSICL की लापरवाही उजागर

महज 1 साल पुराने भवन में छत और ड्रेनेज सिस्टम का फेल होना निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 14 मई 2025 को बड़े धूमधाम से उद्घाटन हुए इस अस्पताल की पूरी जिम्मेदारी बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर कार्पोरेशन लिमिटेड की है। करोड़ों खर्च करने के बाद भी भवन में वाटरप्रूफिंग और ड्रेनेज का सही प्लान नहीं बना। ठेकेदार की लापरवाही और BMSICL के अधिकारियों की मॉनिटरिंग में कमी का खामियाजा अब मरीज भुगत रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही तय हो

OT में पानी घुसना मरीजों की जान से खिलवाड़ है। एक तरफ सरकार ‘स्वास्थ्य क्रांति’ के दावे करती है, दूसरी तरफ मॉडल अस्पताल की छत ही लीक कर रही है। स्वास्थ्य विभाग को अब तय करना होगा कि निर्माण में गड़बड़ी करने वाले ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी। मरीजों को बेहतर सुविधा देने के वादे तब तक खोखले हैं जब तक करोड़ों की इमारतें एक बारिश भी नहीं झेल पातीं।

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