त्यौंथर रीवा/ खबर डिजिटल/ अरविन्द तिवारी/ जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षण संस्थानों को केवल डिग्री बांटने का केंद्र मानने के बजाय उन्हें नवाचार, अनुसंधान और रचनात्मकता का प्रमुख आधार बताया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिकता और परंपरा के संतुलन से ही देश का समग्र विकास संभव है, इसलिए विश्वविद्यालयों की यह जिम्मेदारी है कि वे युवाओं में भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव जगाएं। समारोह में 141 विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदक और 182 शोधार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।
राष्ट्रपति ने विशेष रूप से छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर प्रसन्नता जताते हुए युवाओं से अपील की कि वे अपनी शिक्षा को केवल निजी करियर तक सीमित न रखें, बल्कि जनजातीय समाज और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए आगे आएं, ताकि ‘विकसित भारत-2047’ का सपना हकीकत बन सके।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सलाह दी और विश्वविद्यालयों से पांच-पांच पिछड़े गांवों को गोद लेने का आग्रह किया, ताकि युवा जमीनी हकीकत समझकर समाज सेवा से जुड़ सकें।
वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अमर वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय उनके स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश का उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर 28.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इस ऐतिहासिक अवसर पर कुलगुरु डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने विश्वविद्यालय को पहली बार मिले ‘एनएएसी A+’ ग्रेड की उपलब्धि भी साझा की, जिसने समारोह के गौरव को और बढ़ा दिया।
