Know take upcoming five major decisions In BJP: नई दिल्ली/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की है, सभी 243 सीटों के नतीजे आने के बाद एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला, तो महागठबंधन को मुंह की खानी पड़ी। राज्य की 243 सीटों में से सबसे ज्यादा बीजेपी ने 89 सीटें जीती, तो वहीं सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड को 85 सीटों पर फतह हासिल की, एनडीए में शामिल चिराग पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास ) को 19 सीटें मिली, जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) को 5 सीटें मिली हैं, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा चार सीटें जीतने में सफल रही। महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीद्वार तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा, महागठबंधन का नेतृत्व कर रही पार्टी को सिर्फ 25 सीटों पर संतोष करना पड़ा, वहीं सहयोगी दल कांग्रेस को मात्र 6 सीटें हासिल हो पाई,भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन को 2 सीटें मिलीं. जबकि असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम सीमांचल की 5 सीटें जीतने में कामयाब हो गई, इसी तरह इंडियन इन्क्लुसिव पार्टी, माकपा और बहुजन समाज पार्टी को एक-एक सीट मिली है।
बीजेपी प्रचंड बहुमत से उत्साहित
बिहार विधानसभा की जीत के बाद पीएम मोदी काफी उत्साहित दिखाई दिए, बिहारी गमछा उड़ाते हुए उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों गर्दा उड़ा दिया। उनका यह कहना उत्साह की वह निशानी है कि मोदी-शाह युग में अभी काफी कुछ नया देखने को मिलेगा। पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए भी दोनों ही नेता काफी उत्साहित नजर आए, कहा जा रहा था कि गुजरात के इन दिग्गजों की जगह पार्टी में अब कुछ नए नेताओं को आगे किया जाएगा, लेकिन अभी यह संभव नहीं दिखाई दे रहा, क्योंकि बीजेपी इनके नेतृत्व में आगे बढ़ती ही जा रही है, कई अभेघ किलों में ध्वस्त कर चुकी है, इसीलिये इनके नेतृत्व में आने वाले वक्त में काफी बदलाव देखने को मिलेंगे।
बीजेपी में देखने को मिलेंगे ये 5 बड़े बदलाव
- राष्ट्रीय अध्यक्ष का जल्द होगा चुनाव
काफी दिनों से बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाया है, ऐसे में रेस में शामिल शिवराज सिंह चौहान, सुनील बंसल, धर्मेंद्र प्रधान, मनोहर लाल खट्टर, भूपेंद्र यादव में से किसी एक को मौका मिल सकता है, हालांकि अब एक मांग और उठ सकती है कि जिस तरह से बिहार ने बीजेपी को प्यार दिया है, तो बिहार से भी किसी नेता का नाम आगे किया जा सकता है, जिनमें सबसे प्रबल दावेदार के रुप में सांसद मनोज तिवारी का आया है। जिस तरह से बिहार की जीत के बाद पीएम मोदी के साथ वो नजर आए हैं, उससे राजनीतिक पंडित उनके उज्जवल राजनीतिक भविष्य को जोड़कर देख रहे हैं। - बिहार चुनाव फॉर्मूला करेंगे लागू
जिस तरह से बिहार में महिला वोटर्स ने बीजेपी को भरपूर समर्थन किया है, उसी स्ट्रेटजी पर बीजेपी काम कर सकती है। आने वाले वक्त में जिन राज्यों में चुनाव होने है, वहां पर महिला वोटर्स को तवज्जो देकर बीजेपी आगे बढ़ सकती है, खासतौर पर बंगाल में बीजेपी किसी महिला मुख्यमंत्री को उम्मीद्वार घोषित कर सकती है। हालांकि महागठबंधन में शामिल ममता बनर्जी को मात देना बीजेपी के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है, फिर भी पिछले चुनाव में बढ़ी सीट से बीजेपी संभावनाएं खोज सकती है, और महिलाओं के लिए योजनाओं का पिटारा लाकर आधी आबादी को आकर्षित करने की योजना पर आगे बढ़ती दिखाई दे सकती है। - देशभर के रणनीतिकारों का दिखेगा जमावड़ा
बिहार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक लिस्ट तैयार की थी, अन्य राज्यों के रणनीतिकारों और जाति आधारित नेताओं को चुनाव में आगे किया था, उदाहरण के लिए यादव बहुल सीटों पर देश के एकमात्र यादव मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश के डॉ. मोहन यादव को 25 सीटों पर चुनाव प्रचार के लिए उतारा था, जिसका नतीजा यह हुआ कि राजद की परंपरागत वोटर्स यादव आबादी का रुख बीजेपी की तरफ हुआ, इसी तरह अन्य सीटों पर भी चुनकर अपनी-अपनी जाति से जुड़े नेताओं को लगाया गया, जिनमें ब्राह्मण, कायस्थ, कुर्मी, जाटव जैसी जातियों के नेता शामिल है, तो इसका असर साफ दिखाई दिया कि उनकी बातों से मतदाता प्रभावित हुआ, और उन जातियों के वोट भी एनडीए को मिलते दिखाई दिए, यही रणनीति अन्य जगह भी बीजेपी आजमाती नजर आ सकती है। - जिताऊ उम्मीद्वारों पर रहेगा फोकस
बिहार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जिताऊ प्रत्याशियों पर खास फोकस किया, जेडीयू के बरार सीटों पर लड़ते हुए मात्र 11 सीटों पर मात खाने वाली बीजेपी की शुरु से स्ट्रैटजी जिताऊ प्रत्याशियों पर थी। जिसका उदाहरण भजन गायिका मैथिली ठाकुर के रुप में दिखाई दिया, वो अलीनगर सीटों से अच्छे मार्जिन से जीतकर आई, जबकि उनको पार्टी में कुछ दिन पहले ही शामिल किया गया था, लेकिन पार्टी की रणनीति काम कर गई और भाजपा की हारी सीट 2025 के चुनाव में पार्टी की झोली में आ गई। इसी तरह से अन्य जगहों पर भी यही फॉर्मूला रहा, जिसे आने वाले समय में बीजेपी में ऊपरी तौर पर अन्य जगहों पर भी लागू करने से गुरैज नहीं करेगी। - संघ के आए नेताओं को दी तवज्जो
बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव में संघ या आनुषांगिक संगठन से आए नेताओं की ड्यूटी काफी पहले ही लगा दी थी, जिस तरह से एमपी के संघ पृष्ठभूमि वाले नेता अजय जामवाल, वीडी शर्मा, हितानंद शर्मा, अरविंद भदौरिया, लोकेन्द्र पाराशर शामिल थे। अन्य प्रदेशों के संघ से आए नेताओं को भी बिहार में लगाया गया था, जिसका असर साफ दिखाई दिया कि एक कुशल और संगठित रणनीति से बीजेपी आगे बढ़ती नजर आई। कई जगहों पर जहां बीजेपी के बीच विरोधाभास दिखाई दे रहा था, वहां इन नेताओं ने समन्वय स्थापित करने में महती भूमिका निभाई तो कुल मिलाकर भाजपा आने वाले समय में इन पांच बिंदुओं को अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव में अन्य रणनीतियों से इतर पार्टी में लागू कर सकती है।


