नईदिल्ली. आप तंबाकू का सेवन (सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, तंबाकू का पान आदि) करते हैं, तो यह समझें कि अपनी जिंदगी और सेहत के साथ दुश्मनी मोल ले रहे हैं। तंबाकू अनेक बीमारियों का एक प्रमुख कारण है। तंबाकू की लत में फंसे व्यक्ति यह संकल्प लें कि उन्हें सेहत के इस दुश्मन को हमेशा के लिए छोड़ देना है। तंबाकू से निर्मित उत्पादों के सेवन से न सिर्फ व्यक्तिगत, शारीरिक और बौद्धिक नुकसान हो रहा है बल्कि समाज पर भी इसके दूरगामी आर्थिक दुष्प्रभाव दिखाई देने लगे हैं।
हालात यह है कि ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (सन् 2016-17) की रिपोर्ट के अनुसार देश में 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में से लगभग 10 करोड़ लोग सिगरेट या बीड़ी का सेवन करते हैं। विश्व में तंबाकू के इस्तेमाल के कारण 70 लाख व्यक्तियों की प्रतिवर्ष मृत्यु हो जाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लाखों लोग तंबाकू की खेती और व्यापार से अपनी आजीविका कमाते हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि इन विरोधाभासों का हल कैसे संभव है।
दरअसल तंबाकू की समस्या का हल हर स्तर पर इच्छा शक्ति से जुड़ा हुआ है। फिर चाहे यह इच्छा शक्ति तंबाकू से निजात दिलाने की हो या फिर तंबाकू छुड़ाने का प्रयास करने वाले लोगों की, उसके घर वालों की हो अथवा नियम कायदे-कानून और सरकारों की हो। धूम्रपान से नुकसान: धूम्रपान के इस्तेमाल से चार हजार हानिकारक रासायनिक पदार्थ निकलते हैं, जिनमें निकोटीन और टार प्रमुख हैं। विभिन्न शोध-अध्ययनों के अनुसार लगभग 50 रासायनिक पदार्थ कैंसर उत्पन्न करने वाले पाए गए हैं। तंबाकू सेवन और धूम्रपान के परिणामस्वरूप रक्त का संचार प्रभावित हो जाता है, ब्लड प्रेशर की समस्या का जोखिम बढ़ जाता है, सांस फूलने लगती है और नित्य क्रियाओं में अवरोध आने लगता है।
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