सीहोर : वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) भोपाल का परिसर सांस्कृतिक रंगों और सामुदायिक सद्भाव से सराबोर हो उठा, जब विश्वविद्यालय ने पोंगल, लोहड़ी, संक्रांति और बिहू जैसे विभिन्न भारतीय कटाई उत्सवों (हार्वेस्ट फेस्टिवल) का भव्य आयोजन किया। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के अवसर पर आयोजित इस समारोह ने न केवल परिसर में छात्रों के पुनर्मिलन का जश्न मनाया, बल्कि भारत की भाषाई और क्षेत्रीय विविधता को भी एक मंच पर ला खड़ा किया। कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के माननीय उपाध्यक्ष श्री शंकर विश्वनाथन और प्रो-वाइस चांसलर डॉ. टी. बी. श्रीधरन की गरिमामयी उपस्थिति में पारंपरिक पूजा और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
समारोह का मुख्य आकर्षण विभिन्न छात्र सांस्कृतिक क्लबों द्वारा दी गई ऊर्जावान प्रस्तुतियाँ रहीं, जिन्होंने लोक संगीत और नृत्य के माध्यम से लोहड़ी और बिहू की भावना को जीवंत किया। इस कार्यक्रम को और अधिक सार्थक बनाते हुए, विश्वविद्यालय ने सीहोर क्षेत्र के स्थानीय किसानों को सम्मानित कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, जो राष्ट्र के भरण-पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अतिरिक्त, छात्रों ने तमिल, पंजाबी, तेलुगु और हिंदी सहित कई भाषाओं में भाषण देकर परिसर की समावेशी संस्कृति और भाषाई समृद्धि का परिचय दिया।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष श्री शंकर विश्वनाथन ने संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय साझा अनुभवों और आपसी सम्मान से बनते हैं, न कि केवल कक्षाओं से। उन्होंने छात्रों द्वारा भारत की समृद्ध विविधता को अपनाते हुए परिसर को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की सराहना की। प्रो-वाइस चांसलर और छात्र कल्याण निदेशक (DSW) ने भी समावेशिता और सहानुभूति को बढ़ावा देने में सांस्कृतिक परंपराओं के महत्व पर जोर दिया। उत्सव का समापन उत्साहपूर्ण भागीदारी और सामूहिक एकता के संदेश के साथ हुआ, जिसने वीआईटी भोपाल के ‘एक ऊर्जावान समुदाय’ के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत किया।


