MP Nigam Mandal: मध्य प्रदेश सरकार ने निगम-मंडलों और आयोगों में नियुक्तियों का पिटारा तो खोल दिया है, लेकिन जारी हुई शुरुआती सूचियों ने भाजपा के कोर वोट बैंक यानी सामान्य वर्ग के अंदर बेचैनी पैदा कर दी है। अब तक घोषित हुए नामों में एक भी सामान्य वर्ग के नेता को स्थान नहीं मिलना जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा होना शुरू हो गई है।
कांग्रेस से आए नेताओं की बल्ले-बल्ले
हैरानी की बात यह है कि इन नियुक्तियों में पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं से ज्यादा उन चेहरों को तवज्जो मिली है जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। कांग्रेस से भाजपा में आए बघेल को कुक्कुट एवं पशुधन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। वही कांग्रेस से आए रामलाल मालवीय को अनुसूचित जाति (SC) आयोग के सदस्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साल 2022 में पार्टी से निष्कासित किए गए एक नेता को मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर संगठन ने सबको चौंका दिया है।
सामान्य वर्ग को झुनझुना?
लगातार जारी हो रही किस्तों में जिस तरह सामान्य वर्ग को किनारे किया जा रहा है, उससे भाजपा के अंदर ही दबी जुबान में विरोध के सुर उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वोटों के गणित और सामाजिक समीकरण साधने के चक्कर में भाजपा अपने सबसे भरोसेमंद वर्ग को ही पीछे धकेल रही है। सवर्ण वर्ग के नेताओं की उम्मीदें अब मायूसी में बदलती जा रही हैं।
दबाव में संगठन और सरकार?
रुक-रुक कर जारी हो रही इन सूचियों से यह संकेत मिल रहे हैं कि सरकार और संगठन के अंदर भारी खींचतान और दबाव की स्थिति है। हर नाम पर कई दौर के मंथन और दिल्ली तक की दौड़ के बावजूद जो परिणाम सामने आ रहे हैं, वे सबका साथ-सबका विकास के नारे पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
आएगी राजनीतिक सुनामी?
हालांकि अभी कई निगमों और मंडलों में पद खाली हैं, जिससे सामान्य वर्ग के नेताओं ने फिलहाल सब्र बना रखा है। लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम है कि अगर आगामी सूचियों में भी यही उपेक्षा जारी रही, तो यह नाराजगी आने वाले समय में एक राजनीतिक सुनामी का रूप ले सकती है।


