मध्य प्रदेश में चार आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों के बाद अब निगम मंडलों की बहुप्रतीक्षित सूची जारी होने के संकेत तेज हो गए हैं. लंबे समय से इंतजार कर रहे नेताओं के लिए यह खबर राहत देने वाली मानी जा रही है. सूत्रों के मुताबिक कई दौर की बैठकों और मंथन के बाद तैयार सूची को राष्ट्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिल चुकी है. हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भाजपा पदाधिकारियों की बैठक में इशारा किया था कि निगम मंडलों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियां एक साथ की जाएंगी. हाल में जारी कुछ आदेशों में अध्यक्षों के साथ सदस्यों के नाम भी शामिल किए गए हैं, जिससे साफ है कि प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. इसी बीच संभावित नामों को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं.
इन नेताओं के नाम आए सामने
सूत्रों के अनुसार निगम मंडलों और प्राधिकरणों में करीब 30 से 32 नेताओं को जिम्मेदारी मिल सकती है. जिन नामों की चर्चा है उनमें चेतन सिंह, विनोद गोटिया, संजय नगायच प्रमुख हैं. इसके अलावा प्रवीण शर्मा, शंशाक श्रीवास्तव, अखिलेष अयाची, दीपक सक्सेना के नाम भी सामने आ रहे हैं. पूर्व मंत्रियों में अरविंद भदौरिया, रामनिवास रावत, उमाशंकर गुप्ता, कमल पटेल, रामपाल सिंह, अचल सोनकर, इमरती देवी, ध्रुव नारायण सिंह, अभिलाष पांडे, आशीष शर्मा, अजय विश्नोई, शैलेंद्र जैन और प्रदीप लारिया को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं. वहीं अंचल सोनकर, संजय शुक्ला, अलकेश आर्य और कलसिंह भाबर के नाम भी चर्चा में बने हुए हैं.
संगठन में जगह न पा सके नेताओं को भी इस सूची से उम्मीदें
बताया जा रहा है कि 2023 विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाने वाले और संगठन में जगह न पा सके नेताओं को भी इस सूची से उम्मीदें हैं. कई वरिष्ठ विधायक, जो मंत्री पद नहीं पा सके, वे भी निगम मंडलों में जिम्मेदारी मिलने की आस लगाए हुए हैं. इससे पहले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग में नियुक्तियां घोषित की जा चुकी हैं. पूर्व विधायक कैलाश जाटव को अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि रामलाल मालवीय और घारेलाल अहिरवार को सदस्य बनाया गया है. वहीं अनुसूचित जनजाति आयोग की जिम्मेदारी पूर्व विधायक रामलाल रौतेल को सौंपी गई है, जो पहले भी इस पद पर रह चुके हैं. आयोग में भगत नेताम और मंगल सिंह धुर्वे को सदस्य नियुक्त किया गया है. साथ ही राज्य महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग में भी नियुक्तियों का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है और जल्द ही इनकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है.
किसको मिलेगी जिम्मेदारी
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अंतिम सूची कब जारी होगी और किन नेताओं को जिम्मेदारी मिलेगी. निगम मंडलों को लेकर सत्ता और संगठन के बीच लंबे समय से चर्चा चल रही थी. भाजपा के कोर ग्रुप की बैठकों में इस पर विस्तार से विचार हुआ और करीब दो दर्जन नामों पर सहमति बनी. इन नामों को केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजा गया था, जहां से मंजूरी मिलने के बाद अब सूची जारी होने की प्रक्रिया तेज हो गई है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य नेतृत्व को स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने की छूट भी दी है.


