सागर/हर्षित पाण्डेय/खबर डिजिटल/ किसी ने क्या खूब कहा है— “आँखें रोती रहीं, पर दिल ने हिम्मत ओढ़ ली… सात बेटियों ने पिता की चिता के साथ अपना संसार भी जलते देखा।” यह पंक्तियां सागर में घटी इस मार्मिक घटना पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं, क्योंकि इसे जिसने भी देखा, उसकी आंखे नम हो गई।
सफाई कर्मचारी का हुआ था निधन
सागर में नगर निगम में सफाई कर्मचारी डालचंद वाल्मिकी राजीव नगर निवासी का बीमारी के चलते अचानक निधन हो गया। पिता के निधन ने पूरे परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया। मृतक की 7 बेटियां हैं—सबसे बड़ी बेटी 23 वर्ष की और सबसे छोटी बेटी मात्र 11 वर्ष की है। घर में कोई बेटा नहीं, लेकिन जिम्मेदारी उठाने का साहस इन बेटियों ने अपने कंधों पर ले लिया।
सात बेटियों ने दी मुखाग्नि
पिता को अंतिम विदाई देने सातों बेटियां श्मशान घाट पहुंचीं और परंपरा निभाते हुए अपने हाथों से मुखाग्नि दी। इस भावुक क्षण को देखकर श्मशान घाट पर मौजूद हर व्यक्ति की आंख भर आई। बेटियों की मजबूती और पिता के प्रति प्रेम ने वहां मौजूद लोगों को भीतर तक झकझोर दिया।
यह दृश्य एक बार फिर साबित कर गया कि बेटियां केवल घर नहीं संभालतीं… रिश्तों का धर्म भी उतनी ही दृढ़ता से निभाती हैं।


