उज्जैन/कमलेश जाटवा/खबर डिजिटल/ शहर में पुलिस और बैंक कर्मचारियों की सूझबूझ से एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ और लाखों की ठगी का शिकार होने से बचा लिया गया। ठगों ने आर्मी से रिटायर्ड गंगाराम वर्मा को सीबीआई और मुंबई हाईकोर्ट के फर्जी वारंट दिखाकर डराया था और मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर 3 लाख रुपये की मांग की थी।
बैंककर्मियों को हुआ संदेश
मंगलवार को जब डरे-सहमे बुजुर्ग भारतीय स्टेट बैंक की नई सड़क शाखा में 3 लाख रुपये का आरटीजीएस कराने पहुंचे, तो बैंक कर्मियों को उनके व्यवहार पर संदेह हुआ। बैंक स्टाफ ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही सीएसपी राहुल देशमुख और सीएसपी दीपिका शिंदे मौके पर पहुंचे और बुजुर्ग को भरोसे में लेकर पूछताछ की।
वीडियो कॉल के जरिए दी गिरफ्तारी की धमकी
बुजुर्ग ने बताया कि उन्हें वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी की धमकी दी जा रही थी। पुलिस ने जांच में पाया कि ठगों द्वारा भेजे गए सभी दस्तावेज और फाइनेंस मिनिस्ट्री के पत्र पूरी तरह फर्जी थे। पुलिस की समय पर दखलअंदाजी से ट्रांजैक्शन रुक गया। बुधवार शाम प्रेस वार्ता के दौरान बुजुर्ग गंगाराम वर्मा भावुक हो गए और उन्होंने एसपी प्रदीप शर्मा को गले लगा लिया। एसपी ने सतर्कता दिखाने वाले बैंक कर्मियों और पुलिस टीम का पुष्पमाला पहनाकर सम्मान किया। पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान वीडियो कॉल या ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी से न डरें और तुरंत पुलिस को सूचित करें।


