भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में फिलहाल मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के मामले में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। मंत्री पद से उनकी ली गई 10 दिन की छुट्टी के बाद प्रदेश में नई सरगर्मी शुरू हो गई, चारों तरफ कहां जाने लगा वह अपने ही पार्टी संगठन से नाराज चल रहे हैं, वही अब कहां जा रहा है कि जल्द ही उनका मंत्री पद छिन लिया जाएगा, हालांकि अब वो एक बार फिर छुट्टी के बाद मैदान में दिखाई दिए हैं, और तो और उनके साथ बैठक में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी नजर आई, लेकिन फिर भी माना जा रहा है कि कुछ तो बड़ा होने वाला है।
क्या घंटा कांड पड़ रहा है भारी?
भागीरथपुरा जल कांड के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से एक रिपोर्टर के सवाल पूछने पर उन्होंने घंटा शब्द का उपयोग किया था। इसके बाद नेशनल मीडिया से लेकर स्थानीय मीडिया में उनका काफी विरोध देखने को मिला था। कांग्रेस ने प्रदर्शन के जरिए उनके बयान की जमकर निंदा की थी, उसके बाद से समीकरण बनने लगे थे, कि कैलाश विजयवर्गीय का पद जा सकता है।
सत्ता और संगठन से कैलाश विजयवर्गीय की नाराजगी!
कैलाश विजयवर्गीय के लिए कहा जाता है कि वो अपनी नाराजगी को जाहिर करने से नहीं चूकते, लेकिन कुछ दिन से वो खुलकर नहीं कह पा रहे थे। अंदरखानों से निकली खबरों के अनुसार कैबिनेट की बैठक में उन्होंने सरकार के निर्णयों पर अपनी नाराजगी जताई, तो संगठन में अपने मन मुताबिक नियुक्तियां नहीं होने के बाद उन्होंने चुप्पी साध ली, कहा जा रहा था कि तभी से उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था, जो कि भागीरथपुरा कांड के बाद रिपोर्टर के सवाल पर घंटा नाद के रूप में सामने आया।
इंदौर की सियासत भी विजयवर्गीय प्रसंग का एक कारण
इंदौर की सियासत दशकों से कैलाश विजयवर्गीय के आसपास घूमती रही है, लेकिन पिछले कुछ सालों से जो घटनाक्रम हुए हैं, उसके बाद पार्टी संगठन को इंदौर में विजयवर्गीय के विकल्प की तलाश थी, लेकिन वह पहले से बीजेपी के सामने मौजूद थे, जैसे पुष्यमित्र भार्गव, गौरव रणदीवे, गोलू शुक्ला, एकलव्य सिंह गौड़ और सावन सोनकर जैसे युवा चेहरों के आगे आने के बाद प्रदेश और स्थानीय स्तर पर कैलाश विजयवर्गीय की इंदौरी पहचान का विकल्प पहले मौजूद था, जिसे विजयवर्गीय गुट विरोधी खेमे का समर्थन प्राप्त हुआ, उसी का नतीजा हुआ कि मोहन राज में विजयवर्गीय का आभामंडल कम हुआ, और कहा जा रहा है कि बीजेपी संगठन विजयवर्गीय को किनारे भी कर दे, तो पार्टी के पास विकल्प तैयार है, जोकि एक बड़े परिवर्तन की आहट है।
कैलाश विजयवर्गीय को नहीं भा रहा था डिमोशन
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की मध्य प्रदेश में एक बार फिर से आमद होने के पहले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव थे। लेकिन एक बार फिर उन्हें पूर्व के पद मंत्री पद से नवाजा गया। जिसकी टीस उनके चेहरे पर कई बार देखी गई, पार्टी सूत्रों के अनुसार कई बार उन्होंने मंत्री पद छोड़ने की पेशकश कर वापस दिल्ली जाने की ख्वाइश रखी। पर पार्टी संगठन ने एक नहीं सुनी, वही अब जो हो रहा है, सबके सामने है, कि विजयवर्गीय के मामले में पार्टी कोई बड़ा फैसला कर सकती है।
एक बार फिर साथ नजर आए ताई और भाई
दरअसल मौका था इंदौर के एलआईजी से नवलखा तक बनने वाले एलिवेटेड ब्रिज के निर्माण को लेकर, जिसमें सालों बाद ताई यानि सुमित्रा महाजन और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय नजर आए, इस बैठक में सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा, गोलू शुक्ला और रमेश मेंदोला शामिल थे। हालांकि इसमें विधायक मालिनी गौड़ और मंत्री तुलसी सिलावट शामिल नहीं हुए, लेकिन कुछ भी हो जानकार बता रहे हैं कि यह बैठक भी सीएम के फैसला करने के बाद आयोजित की गई थी, जिसके चलते सियासी सरगर्मी के बीच चर्चाएं जारी है।


