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बेअसर गश्त, बेखौफ अपराधी: अमकुही गैंगरेप ने खोली पुलिस की पोल

खबर डिजिटल— कटनी सूत्रों के अनुसार जिले के अमकुही पहाड़ी क्षेत्र में नाबालिग से हुए गैंगरेप की सनसनीखेज घटना ने पुलिस की कथित नाइट कॉम्बिंग गश्त और अपराध नियंत्रण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब पुलिस लगातार प्रेस विज्ञप्तियों के ज़रिये एक ही रात में 100 से 150 वारंटियों और पुराने अपराधियों को गिरफ्तार करने का दावा कर रही है।यदि पुलिस का सुरक्षा तंत्र इतना ही मजबूत है कि सैकड़ों आरोपी एक रात में पकड़ लिए जाते हैं, तो फिर उसी पुलिस की मौजूदगी में एक नाबालिग को रात भर बंधक बनाकर खंडहर में रखे जाने जैसी घटना कैसे घट गई—यह सवाल अब आम जनता पूछ रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की कॉम्बिंग गश्त महज़ रिकॉर्डेड अपराधियों तक सीमित रह गई है, जो आसानी से मिल जाते हैं। वास्तविक समय में होने वाले गंभीर अपराधों को रोकने में यह व्यवस्था पूरी तरह विफल नजर आ रही है।विडंबना यह है कि शराब, जुआ या अन्य छोटे मामलों में कार्रवाई होते ही थाने से लेकर जिला मुख्यालय तक श्रेय लेने की होड़ मच जाती है। हर सफलता को वरिष्ठ अधिकारियों के सशक्त नेतृत्व और उच्च मार्गदर्शन का परिणाम बताया जाता है। लेकिन जब अमकुही जैसी बड़ी सुरक्षा चूक सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने को लेकर पूरा सिस्टम मौन साध लेता है।सवाल यह भी है कि जब सफलता का श्रेय वरिष्ठ अधिकारियों को दिया जाता है, तो ऐसी विफलता की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? क्या बीट प्रभारी या थाना प्रभारी तक सीमित कर मामले से इतिश्री कर ली जाएगी?सूत्रों के अनुसार पुलिस की निष्क्रियता के चलते क्षेत्र में लगातार आपराधिक घटनाओं में इजाफा हो रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और वे बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। क्षेत्र में यह धारणा बनती जा रही है कि अपराधियों के मन से खाकी का डर खत्म हो चुका है।विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध मुक्त शहर केवल आंकड़ों और गिरफ्तारी की संख्या से नहीं बनता, बल्कि आम नागरिक के मन में सुरक्षा का भरोसा पैदा करने से बनता है। नाइट कॉम्बिंग गश्त का उद्देश्य केवल दिखावटी कार्रवाई नहीं, बल्कि उन सुनसान इलाकों, पहाड़ियों और संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित करना होना चाहिए, जहां अपराधियों को पनाह मिलती है।अमकुही की यह घटना पुलिस के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि अब हेडलाइन मैनेजमेंट से आगे बढ़कर ग्राउंड मैनेजमेंट पर ध्यान देना होगा, अन्यथा आंकड़ों में अपराध कम और ज़मीनी हकीकत में असुरक्षा बढ़ती ही जाएगी।

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