Monday, November 2, 2026
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सीहोर जिले के बुधनी में छात्रवृत्ति घोटाले का आरोप, जांच की उठी मांग

बुधनी/ कन्हैया नाथ/खबर डिजिटल। सीहोर जिले की बुधनी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत खांडावड़ के बंदरझिरी स्थित शासकीय मिडिल स्कूल में छात्रवृत्ति वितरण सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं के संचालन को लेकर गंभीर अनियमितताओं की चर्चाएं सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2011 से लगातार कई वर्षों तक स्कूल में अध्ययनरत आदिवासी एवं गरीब बच्चों के नाम पर मिलने वाली छात्रवृत्ति राशि के वितरण में गड़बड़ी होने की आशंका जताई जा रही है।

मामला पुराना होने के बावजूद अब यह चर्चा क्षेत्र में तेजी से फैल रही है, जिससे ग्रामीणों में रोष और चिंता दोनों बढ़ती जा रही है। सूत्रों का दावा है कि उस समय छात्रवृत्ति की राशि शासन द्वारा पहले स्कूल के खाते में जमा की जाती थी। इसके बाद संबंधित प्रधानाध्यापक/प्रभारी द्वारा विद्यार्थियों के नाम पर चेक जारी किए जाते थे और बैंक के माध्यम से राशि निकाली जाती थी। आरोप है कि स्कूल प्रभारी द्वारा केवल 8 से 10 बच्चों को साथ लेकर बुधनी स्थित एसबीआई शाखा पहुंचा जाता था, जबकि रिकॉर्ड में छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक दर्शाई जाती थी।

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एक ही बच्चों को बार-बार लाइन में लगाकर राशि निकासी की चर्चा

सूत्रों के अनुसार स्कूल प्रभारी द्वारा अलग-अलग विद्यार्थियों के नाम से विड्रॉल एवं अन्य दस्तावेज तैयार कर उन्हीं बच्चों को बार-बार बैंक में लाइन में लगाकर राशि निकाली जाती थी। भीड़भाड़ और जल्दबाजी के चलते बैंक कर्मचारियों को वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता था। चर्चा है कि कुछ विद्यार्थियों को राशि दी भी जाती थी, लेकिन शेष विद्यार्थियों के नाम पर आई छात्रवृत्ति राशि का वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिल पाया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरह शासन की राशि का दुरुपयोग कर गबन किया गया। इसके साथ ही यह भी आरोप सामने आ रहे हैं कि छात्रवृत्ति एवं अन्य मदों की राशि प्राप्त करने के लिए कुछ बच्चों की उपस्थिति फर्जी तरीके से दर्ज की जाती थी, ताकि स्कूल में छात्र संख्या अधिक दिखाकर योजनाओं का लाभ लिया जा सके।

मध्यान्ह भोजन योजना में भी अनियमितता की आशंका

मामले में मध्यान्ह भोजन योजना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि स्कूल में वास्तविक छात्र संख्या कम थी, जबकि रजिस्टर में संख्या अधिक दर्शाकर शासन से मिलने वाली राशि बढ़ाई जाती रही। इससे मध्यान्ह भोजन के मद में भी अनियमितता होने की आशंका जताई जा रही है।

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पालक-शिक्षक समिति अध्यक्ष के फर्जी हस्ताक्षर का आरोप

इतना ही नहीं, स्कूल की पालक-शिक्षक समिति एवं शाला विकास समिति से जुड़ी राशि को लेकर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि उस समय समिति की अध्यक्ष कम पढ़ी-लिखी थीं और उनके नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर समिति की राशि एवं अन्य मदों की राशि निकाली गई। बताया जा रहा है कि निकाली गई राशि के अनुपात में स्कूल में कार्य या सामग्री दिखाई नहीं देती, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हस्ताक्षरों की जांच हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों का दावा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला धोखाधड़ी एवं सरकारी राशि के गबन जैसी गंभीर धाराओं में अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

“शिक्षा का मंदिर” में भ्रष्टाचार की आशंका पर आक्रोश

क्षेत्रवासियों का कहना है कि विद्यालय को शिक्षा का मंदिर माना जाता है, जहां बच्चों को अनुशासन, संस्कार और ईमानदारी की शिक्षा दी जाती है। यदि विद्यालय स्तर पर ही भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और सरकारी योजनाओं में हेराफेरी जैसी घटनाएं हुई हैं, तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि समाज और शिक्षा व्यवस्था के साथ अपराध है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों से बच्चों का भविष्य प्रभावित होता है और शिक्षा व्यवस्था की साख पर भी प्रश्नचिन्ह लगता है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए गरीब व आदिवासी बच्चों के अधिकारों से जुड़े इस कथित प्रकरण की निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है।

रिकॉर्ड ऑडिट और विभागीय जांच की मांग

क्षेत्रवासियों की मांग है कि शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल के संपूर्ण रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। छात्रवृत्ति वितरण, मध्यान्ह भोजन, उपस्थिति रजिस्टर, शाला विकास समिति एवं पालक-शिक्षक समिति के वित्तीय दस्तावेजों का ऑडिट कराकर सच्चाई सामने लाई जाए। सूत्रों के अनुसार इस संबंध में जल्द ही आरटीआई लगाकर दस्तावेज जुटाने की तैयारी भी की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी प्रभारी/प्रधानाध्यापक के खिलाफ पदमुक्ति, सेवा से पृथक करने एवं कानूनी कार्रवाई जैसी कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए।

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BEO ने झाड़ी, BRC ने जांच का भरोसा दिलाया

इस संबंध में जब ब्लॉक शिक्षा अधिकारी शशिसिंह (BEO) से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि “मुझे इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। आपको जो भी पूछना है, वह जिला शिक्षा अधिकारी से पूछिए।” वहीं बीआरसी मनी शंकर शर्मा (BRC) ने कहा कि यह प्रकरण संज्ञान में आया है वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से एक कमेटी गठित करा कर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी तथा वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। फिलहाल मामला आधिकारिक रूप से उजागर नहीं हुआ है, लेकिन लगातार सामने आ रही चर्चाओं के बाद अब आवश्यकता है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष जांच करें, ताकि वास्तविकता सामने आए और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो सके।

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