शैलेश नामदेव/डिंडोरी/खबर डिजिटल/ जिले में प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है, जहां कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया की पहल पर एक सहायक शिक्षक को 9 साल बाद अपनी सेवा वापस मिली है। यह मामला न केवल एक व्यक्ति की जीत है, बल्कि न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हर पीड़ित के लिए एक मिसाल भी है।
बीमारी ने छीनी थी खुशियां
विकासखंड समनापुर के सहायक शिक्षक संतराम पट्टा साल 2016 में एक गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए थे। स्वास्थ्य इतना बिगड़ गया कि वे स्कूल जाने में असमर्थ हो गए। लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के कारण उनका वेतन रोक दिया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई। परिवार का भरण-पोषण उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका था।
जनसुनवाई में मिला न्याय
बीमारी से उबरने के बाद संतराम ने हार नहीं मानी और कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में उपस्थित होकर अपनी आपबीती सुनाई। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए और नियमों के दायरे में रहकर सहानुभूति पूर्वक निर्णय लेने के निर्देश दिए।
शिक्षक और बैगा समुदाय में हर्ष
जांच पूरी होने के बाद, कलेक्टर के आदेश पर संतराम पट्टा को शासकीय प्राथमिक शाला मानिकपुर में कार्यभार ग्रहण कराया गया। 9 साल के लंबे संघर्ष के बाद नियुक्ति पत्र मिलते ही संतराम और उनका परिवार भावुक हो उठा। इस निर्णय का शिक्षक समुदाय और स्थानीय बैगा समुदाय ने तहे दिल से स्वागत किया है।
कलेक्टर की नसीहत
कार्यभार ग्रहण कराते समय कलेक्टर ने संतराम को नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि जो समय बीत गया, उसकी भरपाई अब विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा देकर करें। उन्होंने शिक्षक को नियमित उपस्थिति और शैक्षणिक सुधार पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।


