मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में उगाया जाने वाला नूरजहाँ आम एक बार फिर सुर्खियों में है. अपने विशाल आकार और बेहतरीन स्वाद के कारण पहचान रखने वाले इस खास आम की मांग इस साल भी जबरदस्त बनी हुई है. हालात ऐसे हैं कि करीब तीन किलोग्राम वजन वाला एक नूरजहाँ आम 3500 रुपये तक में बिक चुका है. इस कीमत ने न सिर्फ स्थानीय बाजार बल्कि आम प्रेमियों के बीच भी चर्चा का विषय बना दिया है. किसानों का कहना है कि इस बार मौसम की परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं रहीं, जिसके कारण उत्पादन अपेक्षा से कम हुआ है. हालांकि पैदावार में कमी आने के बावजूद नूरजहाँ आम की लोकप्रियता में कोई गिरावट नहीं आई है. यही वजह है कि फसल तैयार होने से पहले ही कई ग्राहकों ने इसकी अग्रिम बुकिंग करा ली थी.
पड़ोसी राज्यों से भी पहुंच रहे खरीदार
नूरजहाँ आम का आकर्षण केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है. गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों से लोग इस विशेष आम को खरीदने के लिए संपर्क कर रहे हैं. इसकी सीमित उपलब्धता और अनोखी पहचान के कारण बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है. स्थानीय किसान शिवराज जादव और भारतसिंह जादव के अनुसार, इस साल बगीचों में फल कम लगे हैं, लेकिन जो फल तैयार हुए हैं उनकी गुणवत्ता और आकार बेहद शानदार है. यही कारण है कि खरीदार ऊंची कीमत चुकाने के लिए भी तैयार हैं.
आम की सुरक्षा के लिए लगाए गए विशेष इंतजाम
नूरजहाँ आम की बढ़ती कीमत को देखते हुए किसान इसकी सुरक्षा को लेकर भी पूरी तरह सतर्क हैं. बगीचों में लगे फलों को चोरी या नुकसान से बचाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. किसानों ने पूरे बगीचे की निगरानी के लिए 10 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है, जो दिन-रात पहरा दे रहे हैं.
अफगानिस्तान से अलीराजपुर तक का सफर
नूरजहाँ आम का इतिहास भी काफी दिलचस्प माना जाता है. किसानों के मुताबिक यह मूल रूप से अफगानी नस्ल का आम है. इसकी कलम वर्ष 1965 में गुजरात के रास्ते यहां लाई गई थी. अलीराजपुर के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी ने इस किस्म को ऐसा अनुकूल वातावरण दिया कि यह धीरे-धीरे क्षेत्र की पहचान बन गया. इस वर्ष पेड़ों पर डेढ़ किलो से लेकर तीन किलो तक वजन वाले फल देखने को मिले हैं. आकार और वजन के आधार पर इनकी कीमत तय की जाती है. छोटे फलों की कीमत 1000 से 1500 रुपये तक रही, जबकि सबसे बड़े फलों ने 3500 रुपये तक का आंकड़ा छू लिया. किसान भारतसिंह जादव का कहना है कि नूरजहाँ आम अब केवल एक फल नहीं, बल्कि अलीराजपुर की पहचान बन चुका है. इसकी लोकप्रियता और विशिष्टता के चलते इसे वर्ष 1999 और 2010 में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिल चुका है.
