Monday, November 2, 2026
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इंदौर में भविष्य निर्माण पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, देश-विदेश के विशेषज्ञों ने की सहभागिता

श्री वैष्णव कॉलेज इंदौर में ‘भविष्य निर्माण’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

इंदौर/नरेन्द्र महावर/खबर डिजिटल/ श्री वैष्णव कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, इंदौर के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं एनडीएलआई क्लब (आईआईटी खड़गपुर) के संयुक्त तत्वावधान में 24 जून 2026 को “नवाचार, सतत विकास एवं वैश्विक सहभागिता के माध्यम से भविष्य का निर्माण” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संपन्न हुआ, जिसमें देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. परितोष अवस्थी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन किया तथा संगोष्ठी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि रहे मौजूद

मुख्य अतिथि इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अपने संबोधन में कहा कि नवाचार को केवल भविष्य की परिकल्पना तक सीमित न रखकर वर्तमान जीवन और कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज किए गए नवाचार ही कल के मजबूत और विकसित समाज की नींव रखते हैं। इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंधन की ओर से उनका सम्मान भी किया गया।

“आपदा से अवसर” विषय पर विचार

मुख्य वक्ता के रूप में ऑनलाइन जुड़े रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने “आपदा से अवसर” विषय पर विचार रखते हुए कहा कि चुनौतियां और संकट नए शोध, नवाचार और विकास की संभावनाओं को जन्म देते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा में शोध संस्कृति को मजबूत बनाने तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

विशिष्ट वक्ता डॉ. सचिन शर्मा, रहे मौजूद

विशिष्ट वक्ता डॉ. सचिन शर्मा, डीसीडीसी, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर ने शिक्षा में सामाजिक उत्तरदायित्व, संवाद कौशल और मानवीय मूल्यों की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि संवेदनशील एवं जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण भी है।

भविष्य निर्माण के सूत्रों पर चर्चा

संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के रूप में डॉ. मारिया लैम्प्रोउ, प्रो. क्रिस्टिना मौरिसियो, श्री सजीकोटा प्रदीप एवं डॉ. अनुश्का इवानियन ने ऑनलाइन सहभागिता करते हुए सतत विकास, वैश्विक सहयोग और नवाचार आधारित शिक्षा के विविध आयामों पर अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर पुरुषोत्तमदास पसारी ने समावेशी और सतत विकास के लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया। वहीं अरविंद गुप्ता ने ऐसे आयोजनों को ज्ञान-साझाकरण और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने वाला प्रभावी मंच बताया।

विभिन्न सत्रों में नवाचार

संगोष्ठी के शोध विषय का परिचय प्रो. विभोर ऐरन ने प्रस्तुत किया। तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता डॉ. सुहास ढांडे, डॉ. विमल शर्मा एवं डॉ. विपुल पटेल ने की। विभिन्न सत्रों में नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सतत विकास, शिक्षा, प्रबंधन, वैश्विक सहभागिता एवं सामाजिक विज्ञान से संबंधित शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन के पश्चात उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियों को सम्मानित किया गया।

समापन सत्र में उच्च शिक्षा विभाग, भोपाल के ओएसडी डॉ. दिनेश दवे ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।
संगोष्ठी में देश और विदेश के विभिन्न संस्थानों से कुल 192 प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया। इनमें 89 प्रतिभागियों ने ऑफलाइन तथा 85 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन शोधपत्र प्रस्तुत किए, जबकि 18 प्रतिभागियों ने सहभागिता श्रेणी में भाग लिया।

कार्यक्रम का हुआ सफल आयोजन

कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. राजेश सेठी, डॉ. राकेश उपाध्याय सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों एवं आयोजन समिति का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष दुबे ने किया।

अतिथियों, वक्ताओं, का किया आभार व्यक्त

अंत में महेश चिमनानी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शोधार्थियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया, जबकि प्रो. श्रद्धा मान्धन्या ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा महाविद्यालय परिवार ने संगोष्ठी की सफलता पर सभी को शुभकामनाएं दीं।

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