MP Congress: मध्यप्रदेश की सियासत में उस समय भूचाल आ गया जब कांग्रेस के दिग्गज और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के उस बयान के खारिज कर दिया, जिसमें पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर वीर भारत ट्रस्ट को करोड़ों रुपये की 500 एकड़ सरकारी जमीन महज 1 रुपये प्रति एकड़ में रेवड़ी की तरह बांटने का आरोप मढ़ा था। जीतू पटवारी ने इस मामले में मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी को घेरते हुए सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। लेकिन दिग्विजय सिंह ने पटवारी के इस पूरे दावे को हवा में उड़ा दिया और अपनी ही पार्टी को बैकफुट पर ला खड़ा किया।
निकाली पटवारी की हवा
दिग्विजय सिंह ने कहा है कि इस देश में दलालों की कोई कमी नहीं है। दलाल लोग झूठे आरोप लगाना और पैसा वसूल करने का धंधा चला रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने जीतू पटवारी के आरोपों को साफ किया कि वीर भारत न्यास पूरी तरह से एक शासकीय ट्रस्ट है, जो संस्कृति मंत्रालय के अधीन आता है। जमीन भी सरकारी है और ट्रस्ट भी सरकारी है, इसे बस एक सरकारी विभाग से दूसरे सरकारी ट्रस्ट में ट्रांसफर किया गया है।
कमलनाथ भी रहे अध्यक्ष
सिंह ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि सूबे के मुख्यमंत्री ही इस ट्रस्ट के अध्यक्ष होते हैं। जब प्रदेश में कमलनाथ की कांग्रेस सरकार थी, तब कमलनाथ भी इसके अध्यक्ष रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि वे खुद इस जमीन को ओबेरॉय होटल को देने जा रहे थे, लेकिन आरएसएस के दबाव के कारण ऐसा नहीं कर सके।
क्या है वीर भारत ट्रस्ट?
दरअसल, यह न्यास मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग का संस्थान है। इसका उद्देश्य भारतीय इतिहास, संस्कृति, राष्ट्र के गौरवशाली नायकों, संतों, विचारकों और वैज्ञानिकों के जीवन पर शोध, अनुसंधान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करना है। अप्रैल 2013 में पंजीकृत इस निकाय की संरचना पूरी तरह सरकारी है। कैबिनेट द्वारा अनुमोदित इस ट्रस्ट में दो-तिहाई से अधिक सदस्य सरकार के सीधे प्रतिनिधि होते हैं। मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष और संस्कृति मंत्री इसके कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
कौन हैं श्रीराम तिवारी?
आपको बता दें कि देश और मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक संवर्धन में श्रीराम तिवारी का नाम सम्मानित माना जाता है। वर्तमान में वे मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार है। ने संस्कृति के क्षेत्र में कई योगदान देते आए है।
