मध्य प्रदेश कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से चल रही अंदरूनी हलचल के बीच एक और अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह से मुलाकात की है. दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई बातचीत के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. हालांकि इस मुलाकात को लेकर किसी तरह की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसके कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं.
पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस से दिया था एकजुटता का संदेश
इससे पहले कांग्रेस के भीतर मतभेदों की खबरों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. उस दौरान दिग्विजय सिंह ने साफ कहा था कि वह कांग्रेस के किसी भी नेता के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कुछ गलत नहीं कह सकते. उन्होंने जीतू पटवारी को अपने बेटे जैसा बताते हुए यह संदेश देने की कोशिश की थी कि पार्टी के भीतर किसी तरह का व्यक्तिगत विवाद नहीं है.
पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक के बाद बढ़ी थीं चर्चाएं
हाल ही में हुई पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक के दौरान दिग्विजय सिंह को लेकर कुछ सवाल उठने की खबरें सामने आई थीं. इन चर्चाओं के बाद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति फिर सुर्खियों में आ गई. ऐसे माहौल में उमंग सिंघार का दिग्विजय सिंह से मिलना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यही वजह है कि इस मुलाकात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.
सिंघार बोले, पार्टी में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार
दिग्विजय सिंह से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है और यहां हर नेता को अपनी राय रखने की पूरी स्वतंत्रता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संगठन से जुड़े विषयों पर चर्चा सार्वजनिक मंच के बजाय पार्टी के अंदर ही होनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं के बीच पूरा समन्वय बना हुआ है और किसी तरह की नाराजगी जैसी स्थिति नहीं है.
स्लीपर सेल की बात को किया खारिज
उमंग सिंघार ने कांग्रेस के भीतर स्लीपर सेल होने की चर्चाओं को भी पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक में जो मुद्दे उठे थे, वे अब खत्म हो चुके हैं और उन्हें अनावश्यक रूप से तूल नहीं दिया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिग्विजय सिंह से उनकी मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से देखने की जरूरत नहीं है. इसके बावजूद इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है. क्योंकि उमंग सिंघार को लंबे समय से दिग्विजय सिंह के करीबी नेताओं में माना जाता रहा है. ऐसे में दोनों नेताओं की यह मुलाकात आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर भी देखी जा रही है.
