प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में संभावित विस्तार को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि इस फेरबदल का असर मध्य प्रदेश की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है. सूत्रों के अनुसार इस बार केंद्र सरकार में प्रदेश के मंत्रियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है. अगर ऐसा होता है तो मध्य प्रदेश से कई नए सांसदों को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है.
इन नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में
कैबिनेट विस्तार को लेकर जिन नेताओं के नाम सबसे अधिक सामने आ रहे हैं, उनमें भिंड से दूसरी बार सांसद बनीं संध्या राय और राज्यसभा सांसद तरुण चुग शामिल हैं. इसके अलावा भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और खजुराहो सांसद वीडी शर्मा, सतना से सांसद गणेश सिंह और शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह के नाम भी संभावित दावेदारों की सूची में बताए जा रहे हैं. फिलहाल मध्य प्रदेश से पांच लोकसभा सांसद और एक राज्यसभा सांसद मोदी सरकार में मंत्री हैं. हालांकि इस बार तीन से चार नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है.
संध्या राय पर क्यों है खास नजर
भिंड सांसद संध्या राय जाटव समाज से आती हैं और उनका संसदीय क्षेत्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से जुड़ा हुआ है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलती है तो भाजपा उन्हें उत्तर प्रदेश में जाटव समाज के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की जिम्मेदारी भी दे सकती है.
आदिवासी चेहरों को भी मिल सकता है मौका
सूत्रों के मुताबिक यदि केंद्रीय मंत्रिमंडल में मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव होता है तो महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर की जगह शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह को मौका मिल सकता है. वहीं अगर आदिवासी नेतृत्व को नया चेहरा देने का फैसला होता है तो बैतूल सांसद दुर्गादास उईके की जगह खरगोन सांसद गजेंद्र सिंह पटेल को राज्यमंत्री बनाया जा सकता है.
वीडी शर्मा और गणेश सिंह भी मजबूत दावेदार
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. पार्टी उन्हें संगठन में राष्ट्रीय स्तर की बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है या फिर सीधे मोदी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. दूसरी ओर सतना से पांच बार सांसद रहे गणेश सिंह का नाम भी मंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में गिना जा रहा है.
कैबिनेट विस्तार पर टिकी हैं प्रदेश की नजरें
हालांकि अभी तक केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार के कैबिनेट विस्तार में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी पहले से ज्यादा मजबूत हो सकती है. यदि ऐसा होता है तो प्रदेश को केंद्र सरकार में और अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है.
