डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र कमको मोहनिया में प्रशासन के एक फैसले ने ग्रामीणों और छात्राओं की चिंता बढ़ा दी है। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा पूर्व में स्वीकृत किए गए 100 सीटर बालिका छात्रावास की क्षमता को घटाकर अब केवल 50 सीटर कर दिया गया है। विभाग के इस संशोधित आदेश के बाद से क्षेत्र के ग्रामीणों, अभिभावकों और छात्राओं में गहरा असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।
यह पूरा मामला कमको मोहनिया ग्राम पंचायत के आसपास 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 12 गांवों से जुड़ा है। इन गांवों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ाई करने वाली लगभग 150 से अधिक आदिवासी बालिकाएं हैं। यहाँ से सबसे नजदीकी दूसरा कन्या छात्रावास करीब 20 किलोमीटर दूर है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर छात्रावास की क्षमता घटने से करीब 100 छात्राएं आवासीय सुविधा से वंचित रह जाएंगी।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि छात्रावास की सुविधा न होने के कारण छात्राओं को पढ़ाई के लिए रोजाना घने जंगलों और नालों को पार करके जाना पड़ता है। रास्ते में जंगली जानवरों और असामाजिक तत्वों का लगातार खतरा बना रहता है। सुरक्षा के इसी डर के कारण कई माता-पिता अपनी बेटियों को आठवीं कक्षा के बाद आगे पढ़ाने से कतराने लगते हैं। अगर यहाँ 100 सीटों का छात्रावास बनता, तो बेटियों को सुरक्षित माहौल में उच्च शिक्षा का अवसर मिलता।
इस गंभीर समस्या को लेकर ग्राम पंचायत कमको मोहनिया के सरपंच फूल सिंह मरकाम ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने 29 जून 2026 को डिंडोरी कलेक्टर और जनजातीय कार्य विभाग को एक आधिकारिक पत्र भेजा है।
सरपंच फूल सिंह मरकाम ने कहा, ”प्रशासन का यह फैसला सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे के विपरीत है। केवल 50 सीटों की मंजूरी मिलने से आधे से ज्यादा छात्राएं शिक्षा से वंचित हो जाएंगी। हमारी मांग है कि पूर्व की भांति 100 सीटर छात्रावास की स्वीकृति को तुरंत बहाल किया जाए। यदि शासन ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र की बेटियों की शिक्षा गंभीर रूप से प्रभावित होगी।”
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि आदिवासी क्षेत्र की छात्राओं के सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस संवेदनशील मामले पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
