मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है. बागेश्वर धाम सरकार के भाई शालिग्राम गर्ग को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक प्रक्रिया पूरी करते हुए जेल भेज दिया है. शाम के समय जब पुलिस उन्हें जेल लेकर पहुंची, तब परिसर के बाहर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर तैनात रहे ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो.
जेल पहुंचने के दौरान मीडिया के प्रतिनिधियों ने शालिग्राम गर्ग से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया. वह पूरे समय चेहरे पर मास्क लगाए रहे और कैमरों से बचते नजर आए. पत्रकार लगातार सवाल पूछते रहे, लेकिन उन्होंने पूरी तरह चुप्पी बनाए रखी. अब उन्हें जेल में ही रात बितानी होगी.
किसान को गोली मारने के आरोप में दर्ज हुआ मामला
पूरा मामला छतरपुर जिले के गढ़ा गांव के पास स्थित कोड़ा गांव का बताया जा रहा है. आरोप है कि किसान मोतीलाल कुशवाह को गोली मारने की घटना में शालिग्राम गर्ग का नाम सामने आया. घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और कार्रवाई करते हुए शालिग्राम गर्ग तथा उनके सहयोगी अंकित मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस के अनुसार इस मामले में कुल चार लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है. अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पहले ही बनाई थी दूरी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बागेश्वर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पहले दिया गया बयान भी चर्चा में है. उन्होंने स्पष्ट कहा था कि उनके भाई के किसी भी व्यक्तिगत मामले से उनका कोई संबंध नहीं है और ऐसे मामलों में उनका नाम नहीं जोड़ा जाना चाहिए.
हालांकि, इस बयान के बाद भी शालिग्राम गर्ग की बागेश्वर धाम से जुड़ी गतिविधियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सोशल मीडिया पर एक कथित दस्तावेज भी वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि बागेश्वर धाम समिति द्वारा खरीदी जा रही कुछ जमीनों का मालिकाना हक शालिग्राम गर्ग के नाम पर दर्ज है. हालांकि, इस वायरल दस्तावेज की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
जांच जारी, कई सवालों के जवाब बाकी
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है. घटना में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच जारी है. वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दस्तावेजों और अन्य दावों की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी.
