डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ Dindori: शाहपुरा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के सरकारी दावे ज़मीनी स्तर पर किस तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं, इसका एक जीता-जागता उदाहरण डिंडोरी जिले के शाहपुरा जनपद अंतर्गत ग्राम करौंदी में देखने को मिला है। यहाँ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 15वें वित्त आयोग योजना के अंतर्गत लगभग 65 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से एक उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन, ठेकेदार की मनमानी और घटिया निर्माण सामग्री के खेल ने इस सरकारी इमारत को शुरू होने से पहले ही खतरों के साए में ला खड़ा किया है।
स्थानीय ग्रामीणों और विभागीय जांच में जो खामियां सामने आई हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। निर्माणाधीन स्वास्थ्य केंद्र की इमारत में अभी से ही कई गंभीर तकनीकी दोष दिखने लगे हैं।
इमारत को मजबूती देने वाले मुख्य खंभे अभी से चटकने लगे हैं और उनमें साफ तौर पर दरारें देखी जा सकती हैं। यही नहीं, छत को रोकने वाली बीम भी नीचे की तरफ झुक गई है, जिससे पूरी बिल्डिंग की लाइफ पर सवालिया निशान लग गया है।
ढलाई के काम में इतनी लापरवाही बरती गई है कि कई जगहों पर कंक्रीट खोखली रह गई है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘हनीकॉम्ब’ कहा जाता है। यह साफ तौर पर दिखाता है कि सीमेंट-कंक्रीट का मिश्रण सही तरीके से नहीं भरा गया।
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पिलर और बीम को मजबूत बनाने के लिए जितने सरियों की जरूरत थी, ठेकेदार ने उसमें कटौती कर दी है। इसके अलावा निर्माण में बेहद घटिया दर्जे की ईंटों, घटिया रेत और नाममात्र की सीमेंट का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के सब-इंजीनियर इस साइट का दो बार निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन ठेकेदार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा।
पहला निरीक्षण (29 मई 2026): इस दौरान अधिकारियों ने पाया कि साइट पर कोई सूचना बोर्ड तक नहीं लगा है, जिससे लोगों को योजना और बजट का पता चल सके। साथ ही कंक्रीट कार्य में भारी कमियां मिलीं। ठेकेदार को सुधार के लिए मौखिक हिदायत दी गई।
दूसरा निरीक्षण (14 जुलाई 2026): जब विभाग की टीम दोबारा जांच करने पहुंची, तो हालात जस के तस थे। ठेकेदार ने पुरानी कमियों में कोई सुधार नहीं किया था। इसके बाद विभाग ने एक आधिकारिक ‘तकनीकी निरीक्षण प्रतिवेदन’ जारी कर कमियों को दर्ज तो किया, लेकिन काम पर रोक नहीं लगाई गई।
इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की ढीली मॉनिटरिंग और ठेकेदार की बेखौफ मनमानी को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों को आशंका है कि इस घटिया निर्माण के पीछे ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की आपसी मिलीभगत हो सकती है, तभी तो दो-दो बार कमियां पकड़े जाने के बाद भी काम धड़ल्ले से जारी है।
स्थानीय जनता ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि किसी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय तकनीकी एजेंसी से इस पूरे निर्माण कार्य की बारीकी से जांच कराई जाए। जो भी दोषी ठेकेदार या अधिकारी हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि जनता की गाढ़ी कमाई के ₹65 लाख बर्बाद होने से बच सकें और ग्रामीणों को एक सुरक्षित अस्पताल मिल सके।
