सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने राजनीतिक दलों की कार्यशैली को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को टैग करते हुए एक पोस्ट साझा की. इस पोस्ट में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, दोनों के समर्थकों की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए और देश की राजनीतिक संस्कृति में बदलाव की जरूरत बताई.
BJP और कांग्रेस दोनों पर लगाए आरोप
गीतांजलि आंग्मो ने अपने पोस्ट में लिखा कि जब सोनम वांगचुक को पहले हिरासत में लिया गया था, तब भाजपा आईटी सेल से जुड़े लोगों ने उन्हें देश विरोधी, चीन का एजेंट और विदेशी फंडिंग से जुड़े कई आरोपों के साथ निशाना बनाया था. उनका कहना था कि उस समय परिवार पर कई तरह के राजनीतिक आरोप लगाए गए.
उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में जब उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को “दिखावटी” बताया, तो कांग्रेस समर्थकों ने भी उन्हें संघी, आरएसएस समर्थक और भाजपा का पक्षधर बताना शुरू कर दिया. उनके मुताबिक अलग-अलग दलों के समर्थकों का रवैया भले अलग दिखाई देता हो, लेकिन विरोध करने वालों के प्रति उनका व्यवहार लगभग एक जैसा है.
राजनीति की कार्यशैली बदलने की जरूरत
गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि देश को केवल सरकार बदलने की नहीं, बल्कि राजनीति करने के तरीके बदलने की जरूरत है. उनके अनुसार लोकतंत्र में असहमति को सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए, न कि लोगों को अपमानजनक विशेषण देकर चुप कराने की कोशिश की जाए. उन्होंने कहा कि देशभक्ति का आकलन किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्ति की निष्ठा और ईमानदारी से होना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब संवाद को प्राथमिकता दी जाएगी और अलग विचार रखने वालों के प्रति सम्मान का भाव रखा जाएगा. उनके अनुसार सच और पारदर्शिता किसी भी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर होने चाहिए.
भूख हड़ताल के दौरान हुई थीं कई राजनीतिक टिप्पणियां
गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी. इस आंदोलन के दौरान उन्हें लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं. अब उनकी पत्नी का यह बयान एक बार फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है. उन्होंने अपने संदेश के जरिए राजनीतिक दलों से अपील की है कि लोकतंत्र में मतभेदों का समाधान संवाद और सम्मान के साथ किया जाए, न कि व्यक्तिगत आरोपों और कटाक्ष के जरिए.
