अवध और बुंदेलखंड क्षेत्र के यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ी सुविधा देने की तैयारी की है. धर्मनगरी चित्रकूट, प्रतापगढ़ और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बीच रेल कनेक्टिविटी अब पहले के मुकाबले ज्यादा आसान हो जाएगी. रेलवे बोर्ड ने कानपुर-चित्रकूट और कानपुर-प्रतापगढ़ के बीच चलने वाली दो अलग-अलग एक्सप्रेस ट्रेनों को एक ट्रेन के रूप में संचालित करने की मंजूरी दे दी है.
इस फैसले से उन यात्रियों को खास राहत मिलेगी, जिन्हें अभी चित्रकूट, अतर्रा या बांदा से लखनऊ और प्रतापगढ़ जाने के लिए कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन बदलनी पड़ती थी. ट्रेन बदलने के दौरान यात्रियों को कई घंटे इंतजार करना पड़ता था. खासकर परिवार के साथ सफर करने वाले लोगों, बुजुर्गों और ज्यादा सामान लेकर चलने वाले यात्रियों के लिए यह परेशानी का कारण बनता था. नई व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रियों को बीच रास्ते ट्रेन बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
24 कोच की होगी नई संयुक्त एक्सप्रेस
रेलवे की मंजूरी के बाद दोनों ट्रेनों को मिलाकर 14123/14124 ‘मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़-चित्रकूटधाम कर्वी एक्सप्रेस’ के नाम से संयुक्त ट्रेन चलाई जाएगी. पहले दोनों ट्रेनों में 12-12 कोच होते थे, लेकिन अब इन्हें जोड़कर 24 कोच की ट्रेन तैयार की गई है. इससे ट्रेन की क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों को सामान्य तथा स्लीपर श्रेणी में ज्यादा सीटें उपलब्ध हो सकेंगी.
किन प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरेगी ट्रेन
नई एक्सप्रेस चित्रकूटधाम कर्वी से चलकर अतर्रा, बांदा, रागौल, भरुआ सुमेरपुर, यमुना साउथ बैंक, हमीरपुर रोड, घाटमपुर और भीमसेन होते हुए कानपुर सेंट्रल पहुंचेगी. इसके बाद ट्रेन उन्नाव, लखनऊ, निगोहां, बछरावां और रायबरेली के रास्ते प्रतापगढ़ तक जाएगी.
ट्रेन के प्रमुख ठहरावों में चित्रकूटधाम कर्वी, अतर्रा, बांदा, पनारा, कठारा रोड, कानपुर सेंट्रल, उन्नाव, मानक नगर, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, गौरीगंज, चिलबिला और मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ समेत कई स्टेशन शामिल हैं.
धार्मिक यात्रियों को भी मिलेगा सीधा फायदा
इस रेल सेवा का सबसे बड़ा लाभ धार्मिक यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगा. चित्रकूट आने वाले यात्री कामदगिरि दर्शन के साथ आसानी से बांदा के ऐतिहासिक स्थलों और प्रतापगढ़ के मां बेल्हा देवी व मां चंद्रिका देवी धाम तक पहुंच सकेंगे. एक ही ट्रेन से इन प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के बीच यात्रा का विकल्प मिलने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी.
रेलवे के इस फैसले से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है. ट्रेन बदलने और लंबे इंतजार की परेशानी खत्म होने से चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़ और लखनऊ के बीच आवागमन पहले की तुलना में ज्यादा सुगम हो सकेगा.
