Monday, November 2, 2026
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चंदेरी मेंधरातल पर स्कूल नहीं, फिर भी पोर्टल पर संचालन! RTE प्रवेश में अड़चन से उठे गंभीर सवाल

चंदेरी/खबर डिजिटल/ शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था को लेकर चंदेरी में सामने आए एक मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आवेदक राघवेंद्र चौबे ने जनसुनवाई में शिकायत प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि चंदेरी क्षेत्र में ऐसे विद्यालय भी शिक्षा विभाग के पोर्टल पर संचालित दर्शाए जा रहे हैं, जो धरातल पर मौजूद ही नहीं हैं। यही नहीं, आवेदक ने अपनी बच्ची के आरटीई के तहत प्रवेश के लिए आवेदन किया, लेकिन प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो सकी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम चंदेरी मनीष धनगर ने संबंधित स्कूल संचालक को जनसुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। हालांकि, शिकायत के संबंध में बुलाए जाने के बावजूद संबंधित स्कूल संचालक जनसुनवाई में उपस्थित नहीं हुये इसके बाद एसडीएम ने मौजूद बीआरसी प्रतिनिधि को फटकार लगाते हुए विद्यालय के संचालन और पोर्टल पर दर्ज जानकारी को लेकर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।

मामले में एसडीएम द्वारा संबंधित स्कूल संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई किए जाने की बात भी कही गई। इससे यह मामला महज एक बच्ची के आरटीई प्रवेश तक सीमित न रहकर शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड, विद्यालयों के भौतिक सत्यापन और पोर्टल पर दर्ज जानकारी की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन गया है।

आखिर शिक्षा विभाग में जिम्मेदार अधिकारियों की क्या है जिम्मेदारी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई विद्यालय धरातल पर संचालित ही नहीं है, तो वह शिक्षा विभाग के पोर्टल पर विद्यालय के रूप में दर्ज कैसे हुआ? विद्यालय को मान्यता, पंजीयन अथवा आरटीई प्रक्रिया में शामिल करने से पहले उसका भौतिक सत्यापन किस अधिकारी या कर्मचारी द्वारा किया गया? यदि सत्यापन हुआ था तो मौके पर विद्यालय नहीं मिलने के बावजूद उसे पोर्टल पर संचालित दिखाने की स्थिति कैसे बनी?

शिक्षा विभाग के खंड स्तर से लेकर जिला स्तर तक अधिकारियों की जिम्मेदारी विद्यालयों की स्थिति, रिकॉर्ड और योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी से जुड़ी होती है। ऐसे में यह मामला सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही भी जांच के दायरे में आना स्वाभाविक है।

कितने विद्यालय सिर्फ पोर्टल पर धरातल पर शून्य?

राघवेंद्र चौबे की शिकायत ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या चंदेरी में केवल यही एक ऐसा विद्यालय है जो कागज या पोर्टल पर संचालित है, या ऐसे और भी विद्यालय हैं जो धरातल पर अस्तित्व में नहीं हैं?

यदि विस्तृत जांच कराई जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि पोर्टल पर दर्ज विद्यालयों में से कितने विद्यालय वास्तव में संचालित हैं, कितने विद्यालयों में निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध हैं और कितने विद्यालयों का वास्तविक भौतिक सत्यापन किया गया है।

बीआरसीसी की अनुपस्थिति पर कलेक्टर को पत्र

इसी मामले के बीच जनसुनवाई में बीआरसीसी की अनुपस्थिति का मामला भी सामने आया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) चंदेरी द्वारा 25 अगस्त 2026 को कलेक्टर अशोकनगर को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक मंगलवार को खंड स्तर पर जनसुनवाई आयोजित की जाती है और इसके बाद शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की खंड स्तरीय समीक्षा भी की जाती है।

पत्र में कहा गया है कि 25 अगस्त 2026 को जनसुनवाई के दौरान श्री वेद प्रकाश गोयल, बीआरसीसी चंदेरी बिना सूचना अनुपस्थित रहे। इसके कारण उनके विभाग से संबंधित प्राप्त शिकायत आवेदनों का निराकरण नहीं हो सका तथा संबंधित विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा भी नहीं की जा सकी।
एसडीएम ने इस अनुपस्थिति को लेकर कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने हेतु प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है।

अब जांच से सामने आना चाहिए सच

पूरे घटनाक्रम के बाद चंदेरी के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर आरटीई पोर्टल पर विद्यालयों का विवरण कौन दर्ज करता है? विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कब और किसके द्वारा किया गया? गैर-मौजूद अथवा धरातल पर संचालित नहीं होने वाले विद्यालयों को पोर्टल पर स्थान कैसे मिला? ऐसे विद्यालयों में आरटीई के तहत कितने बच्चों ने आवेदन किया और कितने बच्चों को प्रवेश मिला?

आवेदक राघवेंद्र चौबे की शिकायत अब केवल उनकी बच्ची के प्रवेश का मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही की परीक्षा बन गई है।

जरूरत इस बात की है कि चंदेरी क्षेत्र के सभी आरटीई पोर्टल पर दर्ज विद्यालयों का स्वतंत्र एवं मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। यदि जांच में किसी विद्यालय के संबंध में गलत जानकारी दर्ज करना, फर्जी संचालन अथवा नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित संचालक के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी तय की जानी चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल यही है—जब विद्यालय धरातल पर है ही नहीं, तो शिक्षा विभाग के पोर्टल पर वह संचालित कैसे हो रहा है और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?

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