नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद देश की कमान कौन संभालेगा? भारतीय राजनीति में यह सवाल अभी भले ही भविष्य से जुड़ा हो, लेकिन भाजपा की अगली पीढ़ी के नेतृत्व को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार तेज होती रही हैं। फिलहाल किसी नेता को नरेंद्र मोदी का आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया गया है, लेकिन संभावित चेहरों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं। इसके अलावा नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान, देवेंद्र फडणवीस और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जैसे नेताओं को लेकर भी राजनीतिक विश्लेषण सामने आते रहे हैं।
सबसे मजबूत दावेदारों में अमित शाह का नाम
नरेंद्र मोदी के बाद संभावित नेतृत्व की चर्चा में अमित शाह का नाम स्वाभाविक रूप से प्रमुखता से आता है। शाह लंबे समय से मोदी के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में रहे हैं और केंद्र सरकार में गृह मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। भाजपा के संगठन और चुनावी रणनीति पर उनकी मजबूत पकड़ को भी उनकी बड़ी ताकत माना जाता है। हालिया राजनीतिक विश्लेषणों में भी मोदी के बाद भाजपा के नेतृत्व को लेकर अमित शाह की भूमिका पर चर्चा हुई है। हालांकि, इसे पार्टी की ओर से घोषित उत्तराधिकार योजना मानना अभी जल्दबाजी होगी।
योगी आदित्यनाथ क्यों हैं चर्चा में?
दूसरा बड़ा नाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का है। योगी भाजपा के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं और राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी राजनीतिक पहचान लगातार मजबूत हुई है। युवाओं और पार्टी के नए वोटर वर्ग तक पहुंच बनाने के लिए भी योगी की सक्रियता हाल के समय में चर्चा में रही है। ऐसे में भाजपा की अगली पीढ़ी के नेतृत्व की बहस में उनका नाम लगातार बना हुआ है।
नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह भी विकल्प
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह भी ऐसे चेहरे हैं, जिनका प्रशासनिक अनुभव और संगठन में लंबा राजनीतिक सफर है। हालांकि, वर्तमान समय में अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के नामों की तुलना में इन दोनों नेताओं को लेकर उत्तराधिकार की चर्चा अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। इसी तरह केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जैसे नेताओं को भी भाजपा की अगली पीढ़ी के संभावित राष्ट्रीय चेहरों के रूप में राजनीतिक विश्लेषणों में शामिल किया जाता रहा है। हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व को लेकर 2026 में भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ी है।
क्या 2029 का चुनाव तय करेगा अगला चेहरा?
भारत में अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना अपेक्षित है। ऐसे में नरेंद्र मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद की वास्तविक तस्वीर काफी हद तक आने वाले वर्षों की राजनीतिक परिस्थितियों, भाजपा की चुनावी रणनीति, लोकसभा चुनाव के नतीजों और एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन पर निर्भर करेगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिली थीं, जबकि एनडीए ने कुल 293 सीटों के साथ सरकार बनाई। इसलिए भविष्य में प्रधानमंत्री पद का सवाल केवल भाजपा के भीतर की पसंद से नहीं, बल्कि गठबंधन की स्थिति और चुनावी जनादेश से भी जुड़ा होगा।
अभी किसी एक नाम पर मुहर नहीं
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नरेंद्र मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा ने अभी किसी नेता को आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। इसलिए अमित शाह या योगी आदित्यनाथ में से किसी एक को निश्चित अगला प्रधानमंत्री बताना फिलहाल राजनीतिक अनुमान ही होगा। हालांकि, जिस तरह भाजपा की अगली पीढ़ी के नेतृत्व को लेकर चर्चा बढ़ रही है, उससे साफ है कि ‘मोदी के बाद कौन?’ आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति के सबसे बड़े सवालों में से एक रहने वाला है।
आरएसएस ने शुरु किया मंथन
बीजेपी की मातृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी मोदी के विकल्प पर विचार करना शुरु कर दिया है। कहा जा रहा है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इसकी जिम्मेदारी दत्तात्रेय होसबोले को दे दी है। वो अलग-अलग नेताओं के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि अगले चुनाव में मोदी के बाद का चेहरा संघ साफ कर देगा। जिस तरह से राष्ट्रीय अध्यक्ष के रुप में संघ ने नितिन गडकरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था, उसी तरह से प्रधानमंत्री का चेहरा भी संघ तय कर सकता है, क्योंकि राष्ट्रीय चुनौती में जेन-जी आंदोलन बेहद खास हो चुका है। उसी को ध्यान में रखकर अगला बीजेपी का पीएम पद का दावेदार पेश किया जा सकता है।
