Monday, November 2, 2026
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जल, जंगल और ज़मीन को बचाने डिंडोरी में आदिवासियों ने किया प्रदर्शन, बोले समझौता बर्दाश्त नहीं …

डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी में अपनी पैतृक भूमि, सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए डिंडोरी जिले का आदिवासी समुदाय एक बार फिर एकजुट होकर सड़कों पर उतर आया है। जन संघर्ष मोर्चा महाकौशल के तत्वावधान में आयोजित इस विशाल आंदोलन ने जिला प्रशासन और सरकार को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जल, जंगल और ज़मीन के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​सम्मेलन से शुरू हुई जनक्रांति की गूंज

आंदोलन की शुरुआत डिंडोरी बायपास स्थित दरबार ढाबा परिसर से हुई, जहाँ रचनात्मक कांग्रेस के जिला स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में दिल्ली से पधारे वरिष्ठ कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने शिरकत की और स्थानीय आदिवासियों के अधिकारों का समर्थन किया।
सम्मेलन में जिले के दूर-दराज़ इलाकों से आए बैगा समुदाय और अन्य जनजातीय वर्ग के हजारों लोगों ने भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जल, जंगल और ज़मीन केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आदिवासियों की आत्मा और अस्तित्व का हिस्सा हैं।

​सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, गुंजायमान हुए नारे

सम्मेलन के समापन के बाद देखते ही देखते यह सभा एक विशाल रैली के रूप में परिवर्तित हो गई। हाथों में विरोध की तख्तियाँ थामे और अपनी माँगों के समर्थन में नारे लगाते हुए हजारों ग्रामीणों का यह जत्था नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ डिंडोरी कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ा। रैली में पारंपरिक उत्साह और अपनी जल-ज़मीन को खोने का दर्द साफ़ झलक रहा था।

​सामाजिक और मजदूर संगठनों का मिला अटूट साथ

इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय संगठनों का एकजुट होना रही। इस प्रदर्शन को जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस), भारतीय मजदूर संघ, ओबीसी महासभा, रसोइया संघ तथा बैगा चक संघर्ष मोर्चा का पूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ। सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक सुर में कहा कि आदिवासियों के हितों पर कुठाराघात किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

​विस्थापन का गहराता संकट और बेघर होने का डर

विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह डिंडोरी जिले में प्रस्तावित बांध परियोजनाएँ हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि इन बांधों का निर्माण होता है, तो जिले के लाखों आदिवासी परिवार अपनी सदियों पुरानी ज़मीन से बेदखल हो जाएँगे। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा विस्थापितों के पुनर्वास, रोज़गार और उचित मुआवजे के लिए कोई पारदर्शी या ठोस नीति तैयार नहीं की गई है। विकास के नाम पर आदिवासियों को उनकी मूल जड़ों और संस्कृति से काटने का प्रयास किया जा रहा है।

​एडीएम को सौंपा ज्ञापन, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

कलेक्ट्रेट परिसर पहुँचकर जन संघर्ष मोर्चा और सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिलाधिकारी (एडीएम) डिंडोरी को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। डूब क्षेत्र में आने वाले ग्रामीणों और किसान-मजदूर नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यह प्रदर्शन महज़ एक शुरुआत है। यदि सरकार ने आदिवासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इन प्रस्तावित बांधों को शीघ्र निरस्त नहीं किया, तो आगामी दिनों में पूरे प्रदेश स्तर पर और अधिक व्यापक व उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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