मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में करीब डेढ़ महीने पहले हुआ किसान आंदोलन भले ही खत्म हो चुका हो, लेकिन उसका असर अब भी प्रशासनिक स्तर पर दिखाई दे रहा है. मूंग के दाम को लेकर हुए इस आंदोलन में हजारों किसानों के भोपाल पहुंचने के बाद शहर और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई थी. अब इस पूरे मामले को लेकर सरकार जिम्मेदारी तय करने की तैयारी में है.
सूत्रों के मुताबिक, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम, भोपाल, हरदा, नरसिंहपुर समेत आसपास के करीब 10 जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है. इनमें से कुछ अधिकारियों के तबादले पर विचार चल रहा है. बताया जा रहा है कि कुछ कलेक्टरों को हटाने पर सहमति बन चुकी है, लेकिन एसपी के तबादले को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है.
28 से 30 जुलाई तक चला था आंदोलन
मूंग की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों ने 28 से 30 जुलाई के बीच भोपाल में प्रदर्शन किया था. बड़ी संख्या में किसानों के राजधानी पहुंचने के कारण नर्मदापुरम रोड समेत कई प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बन गई थी. लगातार दो दिनों तक लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा.
इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर यह सवाल उठा कि किसानों को भोपाल पहुंचने से पहले रोकने और यातायात व्यवस्था संभालने में स्थानीय प्रशासन कितना प्रभावी रहा. इसी आधार पर संबंधित जिलों के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
एसपी के तबादले पर डीजीपी ने रखी अपनी दलील
सूत्रों के अनुसार, कुछ पुलिस अधीक्षकों को हटाने के प्रस्ताव पर बुधवार देर रात मुख्यमंत्री निवास में चर्चा हुई. इस दौरान डीजीपी कैलाश मकवाना ने अपना पक्ष रखा. बताया जा रहा है कि उन्होंने एसपी को हटाने का विरोध किया और कहा कि पुलिस अधिकारियों ने किसानों को रोकने की कोशिश में अपनी तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ी.
डीजीपी की दलील थी कि संबंधित एसपी वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के मुताबिक काम कर रहे थे. किसानों की संख्या काफी ज्यादा होने के कारण पुलिस के सामने भी कई व्यावहारिक चुनौतियां थीं. इसी वजह से एसपी के तबादले के प्रस्ताव पर फिलहाल रोक जैसी स्थिति बन गई है.
कलेक्टरों के तबादले पर भी असमंजस
जानकारी के मुताबिक कलेक्टरों को हटाने को लेकर पहले सहमति बन चुकी थी, लेकिन एसपी के मामले में बनी स्थिति के चलते पूरी प्रक्रिया फिलहाल अटक गई है. हालांकि सरकार चिह्नित अधिकारियों के तबादले का फैसला किसी भी समय ले सकती है.
किसानों को साधने पर सरकार का फोकस
इधर, सरकार किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कृषि क्षेत्र में नए प्रयोगों पर भी जोर दे रही है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पॉलीहाउस और मधुमक्खी पालन जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की बात कही है.
गौरतलब है कि करीब छह दिन पहले ही प्रदेश में 11 आईएएस समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले किए गए थे. अब एक बार फिर कलेक्टर और एसपी स्तर पर संभावित प्रशासनिक फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हैं.
