Monday, November 2, 2026
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राहुल गांधी के इंदौर दौरे के बाद दिग्विजय सिंह ने चलाया बाण… सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल

जनता का जताया आभार

भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इंदौर दौरे के बाद कांग्रेस के खेमे में काफी खुशी दिखाई दे रही है। उसी का नतीजा है कि पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर तंज की भाषा में एक पोस्ट की, जिसमें उन्होंने स्थानीय नेताओं को जमकर आड़े हाथों लिया। क्या है, इस पोस्ट में पढ़िये।

दिग्विजय सिंह की पोस्ट

आभार! करो दोनों हाथ उठाकर जोरदार अभिनंदन!
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का इंदौर में जो ऐतिहासिक आयोजन हुआ, उसका सारा श्रेय अगर किसी को जाता है, तो वह इंदौर के निष्ठावान ‘सहयोगियों’ को ज़्यादा जाता है।
दिल की गहराइयों से आभार वाली विशेष धन्यवाद सूची:

  1. 1. सबसे पहला शुक्रिया नगर निगम और जिला प्रशासन का, जिन्होंने नेहरू स्टेडियम की अनुमति तुरंत खारिज कर दी। अगर वे स्टेडियम दे देते, तो कांग्रेस इतनी मेहनत करके रीजनल पार्क का सुंदर, खुला और हवादार मैदान कैसे ढूंढ पाती?

  2. 2. कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विशेष आभार और धन्यवाद तो सबसे अलग से बनता है। उन्होंने पहले इसे ‘सर्कस’ कहा और फिर जब कलाकारों व रैपरों की बात आई तो बोले कि ‘रैपर की क्या जरूरत, राहुल गांधी ही काफी हैं।’ इस मुफ्त के ज़बरदस्त प्रचार के लिए पूरे देश की पीआर एजेंसियां कैलाश से ट्यूशन ले सकती हैं। उन्होंने बिना एक रुपया लिए कार्यक्रम की ऐसी पब्लिसिटी की कि जो छात्र नहीं भी आने वाले थे, वे भी उत्सुकता में खिंचे चले आए!

  3. 3.भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने मंच पर ‘वंदे मातरम’ गाने और ‘महापुरुषों की तस्वीरें’ लगाने की शर्तें रखकर कार्यक्रम को अनजाने में एक पवित्र और राष्ट्रवादी कलेवर दे दिया। आयोजकों को तो खुद ही समझ नहीं आ रहा था कि क्या-क्या थीम रखें, सुमित जी ने मुफ़्त में इवेंट मैनेजमेंट की सलाह दे दी।

  4. 4.मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का धन्यवाद और आभार, जिन्होंने अपने बयानों से राहुल को मध्य प्रदेश आने का ऐसा ‘न्योता’ दिया कि मामला सीधे सुर्खियों में आ गया। उनके बयानों ने सीधे राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना दिया।

5. इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) का विशेष रूप से शुक्रिया! 12 हजार वर्ग मीटर की खाली पड़ी ज़मीन का तीन दिन का किराया 10.08 लाख रुपये जमा करवाकर IDA ने यह साबित कर दिया कि इंदौर में लोकतंत्र भी ‘प्राइम लोकेशन’ की प्रॉपर्टी पर ही होता है।

  1. 6. इंदौर पुलिस प्रशासन की ‘वर्मा आयोग’ वाली 31 शर्तों का आभार। जिन्होंने 1991 के ऐतिहासिक भूलों और सुरक्षा नियमों से आयोजन को अंतर्राष्ट्रीय हाई सिक्योरिटी समिट जैसा VIP फील दे दिया।

  2. 7.दिनांक 18-19 सितंबर की रात शहरभर में ‘झूठ की गूंज’ के पोस्टर लगाने वाले अज्ञात सज्जनों का विशेष धन्यवाद! रात के अंधेरे में टॉर्च जलाकर, शहर के अवैध यूनिपोल के माध्यम से मुफ़्त में वो विजुअल इफ़ेक्ट दिया कि सुबह होते ही हर नागरिक समझ गया, हां भाई, आज कुछ बड़ा होने वाला है!

यदि सारे प्रशासनिक पेच, नेताओं के तंज, फीस और रात-रातों-रात होर्डिंग चिपके न होते… तो यह कार्यक्रम इंदौर के आम आयोजनों की तरह ही आता और बस ट्रैफिक जाम लगाकर चला जाता। पूरे घटनाक्रम को इतना ‘सुपरहिट’ और धमाकेदार बनाने के लिए विरोधी खेमे के सभी अप्रत्यक्ष आयोजकों का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद!



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