खबर डिजिटल कटनी—मध्य प्रदेश स्थापना दिवस 1नवंबर को 71वां स्थापना दिवस पर खबर डिजिटल की खास रिपोर्ट /खास सन 1998 में जब जबलपुर से अलग होकर कटनी को एक स्वतंत्र जिले का दर्जा मिला था, तब यहाँ की जनता की आँखों में विकास के सुनहरे सपने थे। आज 28 साल बीत चुके हैं। इन 28 सालों में कटनी ने मध्य प्रदेश और देश की तिजोरी को दोनों हाथों से भरा है। देश का सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शन, एशिया में मशहूर चूना और मार्बल उद्योग, बॉक्साइट के भंडार और अब जमीन से सोना निकलने की आधिकारिक पुष्टि! आर्थिक रूप से कटनी आज किसी महाशक्ति से कम नहीं है, जहाँ छत्तीसगढ़, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से लोग आकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।लेकिन इस चमकती हुई औद्योगिक तस्वीर के पीछे एक स्याह हकीकत छिपी है। 28 साल का होने के बाद भी कटनी विकास के बुनियादी पैमानों पर आज भी बौना खड़ा है। यहाँ न तो आज तक एक हवाई पट्टी बन पाई, न गंभीर मरीजों के लिए कोई शासकीय मेडिकल कॉलेज मिल सका, और न ही यहाँ के युवाओं के लिए कोई बड़ा शासकीय तकनीकी या व्यावसायिक कॉलेज खुल पाया।सवाल बड़ा है: इस दुर्दशा का जिम्मेदार कौन?जब टैक्स और राजस्व देने में कटनी अग्रिम पंक्ति में है, तो विकास में सबसे पीछे क्यों? जनता आज सीधे तौर पर दो मोर्चों पर सवाल खड़े कर रही है:1. जिले के जनप्रतिनिधि: चुनावी वादे या सियासी इच्छाशक्ति की कमी?कटनी ने सत्ता के गलियारों में हमेशा मजबूत प्रतिनिधित्व भेजा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर यहाँ के सांसदों, विधायकों और मंत्रियों की आवाज़ भोपाल और दिल्ली के नीति-निर्धारकों के कानों तक क्यों नहीं पहुँच पाती?• क्या चुनाव जीतने के बाद कटनी की बुनियादी जरूरतें घोषणापत्रों की धूल में खो जाती हैं?• पड़ोसी जिलों में मेडिकल कॉलेज और हवाई पट्टियां मंजूर हो जाती हैं, लेकिन कटनी के जनप्रतिनिधि एक बड़ी यूनिवर्सिटी या शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज लाने में अब तक नाकाम क्यों रहे? यह सीधे तौर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव को दर्शाता है।2. मध्य प्रदेश शासन के जिम्मेदार अधिकारी: फाइलों में दबा कटनी का हक?शासन के आला अधिकारी जो नीतियां और बजट तैयार करते हैं, उनके चश्मे से कटनी का यह दर्द हमेशा ओझल क्यों रहता है? कटनी से हर साल अरबों रुपये का राजस्व (माइनिंग रॉयल्टी, जीएसटी और रेलवे इनकम) भोपाल और दिल्ली जाता है।• नियम के मुताबिक, जिस क्षेत्र से जितना खनिज निकाला जाता है, वहाँ ‘डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन’ (DMF) के तहत भारी-भरकम फंड मिलता है।• फिर जिम्मेदार अधिकारियों ने इस फंड का इस्तेमाल कटनी में एक बड़ा शासकीय कॉलेज या सर्वसुविधायुक्त सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल बनाने में क्यों नहीं किया? प्रशासनिक उदासीनता के कारण कटनी सिर्फ एक ‘कमाऊ पूत’ बनकर रह गया है, जिसकी सेहत का ध्यान रखने वाला कोई नहीं है।सड़क से लेकर सदन तक गूंजनी चाहिए आवाज़आज मध्य प्रदेश स्थापना दिवस मना रहा है। पूरे प्रदेश में विकास की गाथाएं गाई जा रही हैं। लेकिन कटनी के युवा आज भी उच्च शिक्षा के लिए जबलपुर और भोपाल भागने को मजबूर हैं, गंभीर मरीज रास्ते में दम तोड़ रहे हैं क्योंकि यहाँ मेडिकल कॉलेज नहीं है, और बड़े उद्योगपति यहाँ आने से कतराते हैं क्योंकि हवाई कनेक्टिविटी नहीं है।यह रिपोर्ट किसी दल के खिलाफ नहीं, बल्कि कटनी के हक की आवाज़ है। अब समय आ गया है कि जिले के जनप्रतिनिधि अपनी सियासी नींद से जागें और शासन के अधिकारी फाइलों से बाहर निकलकर कटनी को उसका वाजिब हक दें। 28 साल का वनवास बहुत होता है, अब कटनी को विकास चाहिए, खोखले आश्वासन नहीं!
खनिज संपदा का महाभंडार, पर उच्च शिक्षा के लिए युवा लाचार! एक अदद बड़े शासकीय कॉलेज के लिए तरस रही औद्योगिक नगरी
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