Monday, November 2, 2026
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डिंडौरी आवास योजना में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद भी सीएमओ-प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

शैलेश नामदेव, खबर डिजिटल, ​डिंडौरी। मध्य प्रदेश के डिंडौरी नगर परिषद से प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। किफायती आवास योजना (AHP) के तहत गरीब हितग्राहियों से वसूली गई लाखों रुपये की राशि को सरकारी खाते में जमा न किए जाने का गंभीर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि राज्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों और पत्र के बावजूद लगभग एक साल बीत जाने के बाद भी इस मामले में कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे स्थानीय नागरिकों और पीड़ितों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

​क्या है पूरा मामला और फर्जीवाड़े की परतें?

​डिंडौरी नगर परिषद में एएचपी आवास योजना के आवंटन और पैसों की वसूली को लेकर लंबे समय से अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। योजना के नाम पर कई पात्र और गरीब हितग्राहियों से लाखों रुपये वसूले गए, लेकिन यह पूरी रकम परिषद के आधिकारिक बैंक खाते में दर्ज ही नहीं की गई। जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि एक ही रसीद क्रमांक पर दो अलग-अलग रसीदें जारी की गई थीं। इससे साफ जाहिर होता है कि वसूली की पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर और सुनियोजित फर्जीवाड़ा किया गया है।

​प्रभारी मंत्री के कड़े निर्देश भी साबित हुए बेअसर

​मामले की गंभीरता को भांपते हुए राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने 11 नवंबर 2025 को डिंडौरी कलेक्टर को एक आधिकारिक पत्र भेजा था। इस पत्र के जरिए उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर तुरंत जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे:

  • ​एएचपी आवास वसूली: फर्जी रसीदों और सरकारी खाते में जमा न की गई लाखों की रकम की निष्पक्ष जांच।
  • ​वाहन दुरुपयोग: नगर परिषद के सरकारी वाहनों के निजी एवं नियमविरुद्ध इस्तेमाल की पड़ताल।
  • ​बाजार वसूली ठेका: बाजार वसूली प्रक्रिया में बरती गई वित्तीय गड़बड़ियों की जांच।

​मंत्री के इन स्पष्ट निर्देशों के बाद उम्मीद थी कि दोषियों पर गाज गिरेगी, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण मामला आज भी जस का तस ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।

​वर्तमान सीएमओ ने मानी गड़बड़ी, FIR के संकेत

​इस पूरे घटना पर नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) वेद प्रकाश गोस्वामी ने रसीदों में हुई गड़बड़ी और अनियमितताओं को स्वीकार किया है। उन्होंने मीडिया को स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर दोषी कर्मचारियों और इससे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ सख्त धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

​जनता के तीखे सवाल और भविष्य की सुगबुगाहट

​कार्रवाई में हो रही इस लंबी देरी से डिंडौरी के आम नागरिकों और पीड़ित हितग्राहियों के मन में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोग यह पूछ रहे हैं कि आखिर मंत्री के पत्र के बावजूद जिला प्रशासन जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा है? अपनी गाढ़ी कमाई गंवा चुके गरीबों के पैसों का हिसाब कौन देगा और इस पूरे फर्जी तंत्र को संरक्षण देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी? प्रशासनिक अमले की चुप्पी ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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