नई दिल्ली: मिशन पॉसिबल पार्टनरशिप और इंडस्ट्रियल ट्रांजिशन एक्सेलरेटर (ITA) की ग्लोबल प्रोजेक्ट ट्रैकर रिपोर्ट के अनुसार, भारत क्लीन इंडस्ट्री में निवेश की संभावनाओं के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। देश में 61 परियोजनाओं के जरिए कुल 434 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की संभावना है। इसमें 428 अरब डॉलर घोषित परियोजनाओं से और 6.6 अरब डॉलर निवेश की अंतिम मंजूरी प्राप्त व चालू परियोजनाओं से जुड़े हैं।
भारत में क्लीन इंडस्ट्री की 59 परियोजनाएं घोषित हो चुकी हैं, जबकि 2 को निवेश की अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। घोषित परियोजनाओं में 319 अरब डॉलर नवीकरणीय ऊर्जा और 109 अरब डॉलर औद्योगिक परिसंपत्तियों के विकास में निवेश की संभावना है।
ग्रीन अमोनिया इस क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा है। इससे जुड़ी 45 परियोजनाएं हैं। इसके अलावा क्लीन मेथनॉल की 8, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) की 6 और कम कार्बन उत्सर्जन वाले एल्युमीनियम की 2 परियोजनाएं शामिल हैं।
पिछले 12 महीनों में दुनियाभर में 36 परियोजनाओं को निवेश की अंतिम मंजूरी मिली है। इनमें भारत की 2 परियोजनाएं भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में घोषित परियोजनाओं को निवेश योग्य बनाने के लिए स्वच्छ उत्पादों की मांग, भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति, वित्तीय सहायता और नीतिगत स्थिरता महत्वपूर्ण होगी।
यश कश्यप, इंडिया लीड, मिशन पॉसिबल पार्टनरशिप और आईटीए, ने कहा, “भारत के पास नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता का लाभ उठाकर क्लीन इंडस्ट्री और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने का बड़ा अवसर है। दो परियोजनाओं को निवेश की अंतिम मंजूरी मिलना दिखाता है कि भारत में निवेश संभव है। मजबूत मांग, भरोसेमंद स्वच्छ ऊर्जा और कम लागत वाली वित्तीय सहायता के साथ देश 428 अरब डॉलर के निवेश अवसर को औद्योगिक इकाइयों और रोजगार में बदल सकता है।”
फॉस्टीन डेलासेल, सीईओ, मिशन पॉसिबल पार्टनरशिप और कार्यकारी निदेशक, आईटीए, ने कहा, “नए औद्योगिक क्षेत्र वाले देश क्लीन इंडस्ट्री की योजनाओं को निवेश प्राप्त औद्योगिक इकाइयों में बदलने में सफल हो रहे हैं। नवीकरणीय ऊर्जा से समृद्ध देश नए कारखाने स्थापित कर रहे हैं, रोजगार पैदा कर रहे हैं और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। अब चुनौती इन परियोजनाओं को बड़े स्तर पर और तेजी से आगे बढ़ाने की है। इसके लिए देशों के बीच सहयोग जरूरी है।”
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में घोषित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्वच्छ उत्पादों का बाजार, ऊर्जा और आपूर्ति व्यवस्था, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय सहायता पर ध्यान देना होगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा, घरेलू विनिर्माण और रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।
