रीवा/ अरविन्द तिवारी/ खबर डिजिटल/ अभी तक आपने सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात, नकदी तो चोरी होते सुना होगा, लेकिन रीवा में तालाब ही चोरी (Rewa pond theft) हो गए। यह हम नहीं ग्रामीण कह रहे हैं। इसकी शिकायत भी हुई है। पहले ग्राम-पंचायत, फिर थाने, इसके बाद जनपद और फिर कलेक्टर तक। ऐसे में ग्रामीण मुनादी करवा रहे हैं, ‘हम सभी का लाडला अमृत सरोवर बांध, जिसका निर्माण शासन द्वारा करीब 25 लाख की लागत से कराया गया था। वह भी अब चोरी हो चुका है, इसलिए जो भी व्यक्ति अमृत सरोवर बांध और बाकी के तालाबों को खोज निकालेगा, उसे उचित इनाम दिया जाएगा।’
ग्रामीणों का कहना है कि अमृत सरोवर सहित इलाके के कई तालाब जिनका निर्माण लाखों रुपए की लागत से किया गया वो रातों रात चोरी हो गए हैं। वे गांव में मुनादी करवाकर गुम तालाब को ढूंढने वालों को उचित इनाम की घोषणा करवा रहे हैं। पूरा मामला रीवा के पूर्वा मनीराम पंचायत और उससे लगी अमिलिया पंचायत का है। ग्रामीण इसे भ्रष्टाचार की जगह चोरी का मामला बताकर सख्त कार्रवाई चाहते हैं। उन्होंने इसकी शिकायत भी थाने में अजीबोगरीब ढंग से की है। उन्होंने पुलिस के बताया कि रात में तालाब से मछली पकड़कर आए। सुबह फिर से गए तो तालाब कोई चोरी कर ले गया था। कलेक्टर ने इस मामले में जांच के आदेश दिए है। पूरा मामला अमृत सरोवर और अन्य सरकारी मद के तहत खोदे गए बांध और तालाब को लेकर है। कागज में ये बना दिए गए, लेकिन हकीकत में एक गड्ढा तक नहीं खोदा गया।
त्योंथर जनपद के दो ग्राम पंचायतों का मामला
सरकारी दस्तावेज के अनुसार पूर्वा मनीराम पंचायत के कठौली में 24.94 लाख रुपए की लागत से अमृत सरोवर बांध का निर्माण करवाया गया था। राजस्व अभिलेख के मुताबिक यह भूमि क्रमांक-117 पर 9 अगस्त 2023 को बनकर तैयार हुआ था।
अमिलिया पंचायत में मिश्रीलाल पाल और सरस्वती पाल के नाम पर खेत-तालाब योजना के तहत दो तालाबों का निर्माण हुआ। 2 लाख 56 हजार की लागत से ये तालाब गड़रियान टोला में बनाए गए थे। इस हिसाब से प्रति तालाब 1 लाख 28 हजार रुपए की लागत से बना है। खेत-तालाब योजना के तहत एक पंचायत में एक वित्तीय वर्ष में 10 लोगों को इसका लाभ दिया जा सकता है।
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तालाब गबन मामले में किसने क्या कहा…?
सरपंच पूर्वा मनीराम धीरेश तिवारी और सचिव राम मिलन भुरतिया का कहना है कि तालाबों का निर्माण किया गया गया था। धीरे-धीरे तालाब और अमृत सरोवर बांध सूख गए हैं।
जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर का कहना है कि मामले की एक बार जांच करा लेते हैं, जिससे स्पष्ट हो जाएगा कि क्या अनियमितता है और पूरा मामला क्या है।
चाकघाट थाना प्रभारी ने बताया कि अमृत सरोवर के निर्माण में भ्रष्टाचार से संबंधित ग्रामीणों ने थाने में एक शिकायती आवेदन दिया है। मामले को जांच में लिया गया है। आगे जो भी तथ्य निकलकर सामने आएंगे, उसी आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि यह मामला अनियमितता से संबंधित मालूम होता है। हम इसका परीक्षण करा रहे हैं, जो भी तथ्य निकलकर सामने आएंगे। उस आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगा।
यह है वर्तमान स्थिति
तालाब दर्ज, मौके पर कुछ नहीं नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट में शासकीय जमीन 3 एकड़ रकवा नंबर 117 में तालाब दर्ज है, लेकिन मौके पर पड़ताल के दौरान रखवा नंबर 117 में किसी भी प्रकार का कोई तालाब नहीं मिला।
प्राइवेट जमीन रकबा नंबर 122 में तालाब निर्माण की पट्टिका लगी हुई थी, लेकिन ग्रामीणों से पूछने पर पता चला कि यहां से एक बड़ा नाला निकलता था ट्रैक्टर और जेसीबी की मदद से बाहर से मिट्टी खोदकर यहां लाई गई और इस नाले को बांध दिया गया था, जिसके कारण रखवा नंबर 122 में पानी इकट्ठा होने लगा और वह तालाब जैसा दिखने लगा।
अब बरसात के मौसम नाले में जल भरा हुआ और पानी के तेज बहाव के चलते बनाया गया बाद भी टूट गया है और दोबारा नाला अपने पुराने स्वरूप में दिखने लगा।
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अब बात उन ग्रामीणों की, जिन्होंने गबन के मामले को चोरी होना बताया
अखिलेश सिंह ने कहा कि लाखों की लागत से निर्मित अमृत सरोवर बांध का लापता हो जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। न केवल अमृत सरोवर में झाड़ियां उगी नजर आ रही हैं, बल्कि पास की पंचायत के अन्य दो तालाब भी गायब हो चुके हैं। आसपास की 8 से 10 पंचायतों में अगर और जांच करवा ली जाए तो चोरी हुए तालाबों की संख्या बढ़ सकती है।


