आलीराजपुर/संजय वाणी/खबर डिजिटल/ भोपाल में 17 दिसंबर 2025 से 23 दिसंबर 2025 तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय वन मेला 2025 पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन, जैव विविधता और जन-जागरूकता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक आयोजन के रूप में सामने आया। इस सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिले आलीराजपुर की भूमिका और सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिसने जिले को प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
आलीराजपुर के वन क्षेत्रों की झलक बनी आकर्षण का केंद्र
अंतरराष्ट्रीय वन मेले में लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों में आलीराजपुर जिले के घने वन क्षेत्र, जैव विविधता, पारंपरिक ज्ञान और वन आधारित आजीविका मॉडल को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। स्टॉलों में वनों में पाई जाने वाली दुर्लभ एवं औषधीय जड़ी-बूटियां, वन उत्पाद जैसे महुआ, तेंदूपत्ता, शहद, लाख, गोंद, आदिवासी हस्तशिल्प एवं कलाकृतियां, तथा आदिवासी समाज के पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजन ने देश-विदेश से आए पर्यटकों, विशेषज्ञों और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया।
जन-जागरूकता के माध्यम से संरक्षण का संदेश
मेले का प्रमुख उद्देश्य वन एवं पर्यावरण संरक्षण, वन्य जीवों की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग और जन-जागरूकता का विस्तार रहा। इसी क्रम में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में आलीराजपुर जिले में ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय की सहभागिता से चल रहे वन संरक्षण अभियानों को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। इन प्रयासों को विशेषज्ञों ने सामुदायिक वन संरक्षण का प्रभावी मॉडल बताया।
मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटन, उत्कृष्ट कार्यों को सम्मान
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन का उद्घाटन माननीय मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आलीराजपुर जैसे आदिवासी और वन बहुल जिले प्रदेश के पर्यावरण संतुलन की रीढ़ हैं। उन्होंने वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन, स्थानीय रोजगार सृजन और सतत विकास की दिशा में ऐसे मेलों की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान वन एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
आलीराजपुर से जुड़े कर्मचारियों का सराहनीय योगदान
अंतरराष्ट्रीय वन मेला 2025 की सफलता में आलीराजपुर जिले से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
विशेष रूप से
अमन सिंह बघेल (वन परिक्षेत्र अधिकारी, जोबट),
सुनील भिंडे, विपुल चौहान, रवि परमार एवं बाला प्रताप टाइगर
द्वारा किए गए समर्पित कार्यों की मंच से सराहना की गई। इनके प्रयासों से न केवल मेले का सफल संचालन हुआ, बल्कि आलीराजपुर जिले की सकारात्मक छवि को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया गया।
आलीराजपुर के लिए गौरव का विषय
अंतरराष्ट्रीय वन मेला भोपाल आलीराजपुर जिले के लिए गौरव का विषय बना। इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि आदिवासी अंचल केवल वन संसाधनों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उनके संरक्षक भी हैं। यह मेला आने वाले समय में जिले में पर्यावरण संरक्षण, वन आधारित रोजगार और जन-जागरूकता को नई दिशा देने वाला साबित होगा। अंतरराष्ट्रीय वन मेला 2025 ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि “वन बचेंगे तो जीवन बचेगा” और इस संदेश को जमीन पर उतारने में आलीराजपुर जैसे जिले अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।


