सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता कटनी-– जिले में बढ़ती महंगाई ने आमजन की कमर तोड़ दी है। रसोई का खर्च बेकाबू हो चुका है, बच्चों की पढ़ाई बोझ बनती जा रही है और शादी-ब्याह जैसे सामाजिक आयोजन भी अब लोगों के लिए आर्थिक संकट में बदलते दिख रहे हैं। बढ़ती कीमतों के बीच आमदनी स्थिर रहने से मध्यमवर्ग और रोज कमाने-खाने वाले परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में लगातार उछाल ने घर की रसोई का गणित बिगाड़ दिया है। तेल, आटा, चावल, दाल और मसालों की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी ने आम आदमी की थाली पर सीधा असर डाला है। कंपनियों द्वारा पैकेट छोटे कर कीमतें बढ़ाने की नीति ने लोगों की मुश्किल और बढ़ा दी है।अप्रैल में नए शिक्षा सत्र ने अभिभावकों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। निजी स्कूलों की भारी फीस, महंगी किताबें और यूनिफॉर्म के बढ़े दामों ने परिवारों के बजट को हिला दिया है। कई अभिभावक बच्चों की पढ़ाई और घर खर्च के बीच संतुलन बनाने में संघर्ष कर रहे हैं।इधर शादी-ब्याह के सीजन में किराया, खानपान और आयोजन से जुड़े खर्चों में आई बढ़ोतरी ने लोगों को कर्ज तक लेने को मजबूर कर दिया है। सामाजिक जिम्मेदारियां निभाना भी अब आर्थिक चुनौती बनता जा रहा है।बढ़ती महंगाई के बीच राहत की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। सवाल उठ रहे हैं कि जब आय नहीं बढ़ रही तो आखिर आम आदमी लगातार बढ़ते खर्चों का बोझ कब तक उठाएगा। महंगाई अब सिर्फ आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि हर घर की चिंता बन चुकी है।
महंगाई की मार से कराहता कटनी, रसोई से स्कूल तक बिगड़ा आम आदमी का बजट
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