Digvijay vs Uma Bharti: मध्य प्रदेश की राजनीति के दो सबसे बड़े धुरंधरों, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उमा भारती के बीच चल रहा दो दशक पुराना मानहानि का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की वर्तमान स्थिति को लेकर निचली अदालत से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। इस आदेश के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है कि क्या इस पुराने विवाद का जल्द ही कोई फैसला होगा?
हाईकोर्ट ने क्यों मांगी रिपोर्ट?
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि इतने पुराने और महत्वपूर्ण मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट होना अनिवार्य है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की है। यह पूरा विवाद साल 2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ था। उस समय उमा भारती ने दिग्विजय सिंह पर भ्रष्टाचार और करोड़ों रुपये के घोटाले के गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के खिलाफ दिग्विजय सिंह ने उमा भारती के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। मामले में 2017 के कुछ आदेशों को चुनौती दी गई थी, जो क्रॉस एग्जामिनेशन की प्रक्रिया से जुड़े थे। जिसके बाद से मामला लंबे समय से खिंचता चला आ रहा है।
21 साल बाद…
मध्य प्रदेश की सत्ता के लिए 2003 का चुनाव ऐतिहासिक माना जाता है, जिसमें उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा ने दिग्विजय सिंह की 10 साल पुरानी सरकार को उखाड़ फेंका था। उस चुनाव की कड़वाहट आज भी अदालती कार्यवाहियों में नजर आती है। हाईकोर्ट द्वारा स्टेटस रिपोर्ट मांगने का अर्थ है कि अब निचली अदालत को यह बताना होगा कि केस किस स्टेज पर है और इसमें अब तक क्या-क्या कार्यवाही हुई है।
क्या होगा अगली सुनवाई में?
27 अप्रैल को होने वाली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेटस रिपोर्ट आने के बाद हाईकोर्ट इस मामले के जल्द निपटारे के लिए कोई बड़ा आदेश जारी कर सकती है। दो दशकों से चल रही ये कानूनी लड़ाई मध्य प्रदेश की राजनीति के इतिहास का एक अहम हिस्सा बन चुकी है।


