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जमीन के नीचे मनुष्यों का संसार… तामिया के पातालकोट की यही पहचान

रहस्यमयी जड़ी-बूटियों का छिपा खजाना

छिंदवाड़ा/तौफीक मिस्कीनी/खबर डिजिटल/ पातालकोट नाम सुनकर कैसा लगता है, कि जमीन के नीचे का वो संसार जिसके बारे में धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है, लेकिन जान लीजिये इस नाम का एक इलाका मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा की तामिया तहसील में स्थित है, जोकि पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। हो भी क्यूं ना इस जगह पर उन्हें जो अनुभव होता है वो एक अलग ही है, क्योंकि प्राकृतिक सौंदर्य, मानसिक शांति, एक अलग संस्कृति, मिलेट्स और जड़ी-बूटियों का अनूठा संसार जो पर्यटकों को नई ऊर्जा से भर देता है। इसी से हम आज आपको रूबरू करा रहे हैं।

हजारों फीट नीचे की अनूठी दुनिया
जमीन के धरातल से 3 हजार फीट नीचे 79 वर्ग किलोमीटर में लोगों का संसार बसा हुआ है। यहां पर आदिवासी वर्ग की 12 भारिया जनजाति वाले इसी गांव को पातालकोट कहा जाता है, क्योंकि यह जमीन के नीचे बसे हुए हैं। यहां से जड़ी-बूटियों का खजाना छिपा हुआ है जोकि देश-विदेश में मशहूर हैं। जिससे इलाज कराने के लिए अब दूर-दूर लोग आने लगे हैं।

सनथ जयसूर्या का किया था इलाज
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पातालकोट की जड़ी बूटियां से ही श्रीलंका के मशहूर क्रिकेटर सनथ जयसूर्या का इलाज कर किया गया था। वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक वनमंडल में फिलहाल 188 प्रजाति के वृक्ष, 110 झाड़ियां, 577 प्रकार के छोटे पौधे, 132 प्रजाति की बेलाएं, 144 प्रजाति के घास और बम्बू, 98 प्रकार की अलगी शैवाल, 63 प्रकार के फंजाई है. इस प्रकार 21 प्रकार के आर्कीड और 290 प्रकार के औषधीय पौधों को पातालकोट अपने में समेटे हुए हैं।

मिलेट्स के जरिए स्वास्थ्य का ध्यान
मिलेट्स को श्री अन्न की श्रेणी में रखा गया है, जिसका खजाना भी पातालकोट में है, आदिवासियों के भोजन का मुख्य स्त्रोत यही है। वो मधुमक्खियां के शहद और मोटे अनाज के जरिए पोषण लेते हैं, मिलेट्स की तारीफ पीएम मोदी अपने मन की बात कार्यक्रम में कर चुके हैं, इनमें शामिल कोदो कुटकी और बालर की खेती यहां के कुछ गांवों मे होती है, लेकिन उसके अलावा बाकी सभी गांव जंगल पर ही निर्भर हैं।

सूर्य की रोशनी से रहते हैं महरुम
पातालकोट 3 हजार फीट की गहराई में बसा है, इसीलिये यहां पर दिन महज 5 घंटे का होता है, सूर्य की रोशनी इसी वक्त में इन 12 गांवों में पहुंचती है, जोकि अपने आप में एक अनोखा संसार है। वहीं अब इन गांवों की जीवनशैली को समझने के लिए होम स्टे की सुविधा भी शुरु की गई है। पातालकोट के व्यू पांइट वाले गांव में टूरिज्म बोर्ड ने 12 होम स्टे स्वीकृत किए गए हैं।

घाटी की आयु की रिसर्च ने चौंकाया
1700 फीट गहरी घाटी की तली में स्थित इस क्षेत्र के रिसर्च पर इसकी अनुमानित आयु 6 मिलियन वर्ष पाई गई है, क्षेत्र में ब्रायोफाइट्स एवं टेरिडोफाइट्स सहित दुर्लभ वनस्पति और प्राणियों का अनूठा भूभाग भी पाया गया था, जोकि आदियुग की याद दिलाते हैं। 2019 में विश्व भर में अनोखी दुनिया के नाम से अपनी पहचान कायम करने वाले पातालकोट को जैव विविधता विरासत स्थल घोषित किया था. इस स्थान पर पक्षी, कीट, पतंगे, वनस्पति और वन्य प्राणियों की विविध प्रजातियों का संरक्षण करने की योजना है।

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