सिवनी/विशाल भारद्वाज/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों में गंदगी और नशे का बोलबाला है। जनजाति कार्य विभाग के अधीनस्थ अतरिया सीनियर बालक छात्रावास विकासखंड घंसौर में तो हालात बेहद खराब हैं। यहां गंदगी, तंबाकू और गुटखे के निशान जगह-जगह देखे जा सकते हैं।
अधीक्षक की लापरवाही
छात्रावास के अंदर की स्थिति देखकर लगता है कि अधीक्षक अपनी जिम्मेदारियों को भूल गए हैं। वे छात्रावास में रहते ही नहीं हैं और जो कर्मचारी हैं, वे भी प्राइवेट हैं। इसका परिणाम यह है कि छात्रावास में व्यवस्थाएं टूटी-फूटी हैं और बदबू से भर गई है।
स्वच्छ भारत अभियान की पोल
स्वच्छ भारत अभियान और नशा मुक्ति अभियान की पोल खोलता यह छात्रावास स्पष्ट दर्शाता है कि यहां के छात्र तंबाकू और अन्य नशे की आदी हो चुके हैं। अधीक्षक की लापरवाही का ही परिणाम है कि छात्रावास में गंदगी और नशे का बोलबाला है।
लेकिन सवाल यह है कि जांच के बाद क्या होगा? क्या अधीक्षक पर कार्रवाई होगी या फिर सब कुछ यूं ही चलता रहेगा? एक सवाल यह भी कि क्या शासन बच्चों पर इसीलिये राशि खर्च कर रहा है कि वो पढ़ने की बजाय नशे के आदी हो जाए?


