Monday, November 2, 2026
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स्वतंत्रता का जश्न नहीं, बलिदानों को याद करने का दिन

मेरे विचार

आज हम जिस आजादी का जश्न मना रहे हैं, वह हमें यूं ही नहीं मिली। हमारे वीर क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों ने अपने खून से इस आजादी की नींव सींची है। उन्होंने अपने सुख, अपने परिवार और अंततः अपने प्राणों तक का बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वतंत्र भारत का सपना साकार किया।

आज हम जिस आजादी में चैन की सांस ले रहे हैं, अपने अधिकारों के साथ जीवन जी रहे हैं और अपने भविष्य के सपने देख पा रहे हैं, उसके पीछे अनगिनत वीरों का त्याग और संघर्ष छिपा है। इसलिए स्वतंत्रता दिवस हमारे लिए केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि राष्ट्रीय बलिदान और कृतज्ञता का दिवस भी है।

हमें यह याद रखना होगा कि आजादी की कीमत हमारे पूर्वजों ने अपने रक्त और बलिदान से चुकाई है। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम उनके बलिदानों को केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे अवसरों पर याद करके औपचारिकता पूरी न करें, बल्कि उनके संघर्ष और विचारों को अपने जीवन में उतारें।

सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हमारी आने वाली पीढ़ी की है। उन्हें यह समझाना होगा कि स्वतंत्रता दिवस केवल ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और उत्सव का दिन नहीं है। इसके पीछे वर्षों का संघर्ष, असंख्य यातनाएं और अनगिनत बलिदान हैं। जब हमारी नई पीढ़ी इस इतिहास को समझेगी, तभी वह स्वतंत्रता की वास्तविक कीमत और उसके महत्व को महसूस कर पाएगी।

आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम अपने वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए यह संकल्प लें कि उनके बलिदानों को कभी भुलने नहीं देंगे और अपने देश की एकता, अखंडता, सम्मान और प्रगति के लिए सदैव अपना योगदान देंगे।

क्योंकि आजादी केवल विरासत में मिली एक उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों के बलिदानों से मिली एक अमूल्य जिम्मेदारी है।

जय हिन्द,, 🇮🇳 जय भारत

सौरभ श्रीवास्तव कटनी

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