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Friday, April 17, 2026
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सीवर के गंदे पानी से पैसे कमाएगा नगर निगम, रोज साफ हो रहा 2 करोड़ लीटर पानी

आने वाले वक्त में बढ़ेगी क्षमता

सागर/हर्षित पाण्डेय/खबर डिजिटल/ सागर में उद्योगों को बचाने और नए उद्योगों को बसाने के लिए नगर निगम और एमपीआईडीसी ने पहल की है। औद्योगिक विकास निगम अब औद्योगिक क्षेत्र सिदगुवां और प्रस्तावित क्षेत्र गढ़पहरा मुहाल और अन्य एरिया में उद्यमियों को पानी उपलब्ध कराएगा। यह पानी मात्र 6 रुपये प्रति हजार लीटर की दर से मिलेगा। इसके लिए औद्योगिक विकास निगम उद्योग क्षेत्र तक पाइपलाइन बिछाने जा रहा है। इसको लेकर टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई है।इस गर्मी तक औद्योगिक क्षेत्र सिदगुवां में पानी उपलब्ध कराने की तैयारी है।

सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से लाएंगे पानी
सागर के ग्राम पथरिया हाट स्थित सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी लिफ्ट कर लाया जाएगा। यहां पानी लिफ्ट करने पंप भी लगाया जाएगा। इसके साथ ही नगर निगम सागर प्रदेश का पहला निगम बन गया है जो सीवर का पानी फिल्टर कर बेंचेगा। नगर निगम के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता अभी 25 एमएलडी यानी 2.50 करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन की है, यानी इतना पानी ट्रीट होकर तैयार हो रहा है। इस अत्याधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट में पूर्णतः वैज्ञानिक तरीके से दूषित जल को शुद्ध किया जाता है, अभी प्लांट से शुद्ध किए जल को नदी में छोड़ा जा रहा है, प्लांट के प्रोजेक्ट इंचार्ज ने बताया कि दूषित जल के ट्रीटमेंट के बहुआयामी फायदे है प्लांट में त्रिस्तरीय ट्रीटमेंट किया जाता है।

आने वाले वक्त में बढ़ेगी क्षमता
अभी शहर में कई जगह सीवर से घरों के कनेक्शन नहीं हुए हैं। यह काम पूरा होते ही प्लांट की क्षमता बढ़कर रोजाना 4.3 करोड़ लीटर फिल्टर पानी की हो जाएगी। यानी वर्तमान मांग से सवा चार गुना ज्यादा तक पानी औद्योगिक इकाइयों द्वारा मांगा जाएगा तो वह भी उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके अलावा डेयरी विस्थापन स्थल तक भी इस पानी को पहुंचाया जाएगा।

निगमायुक्त ने दी जानकारी
निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने बताया सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का पानी उद्योगों में उपयोग होने से नगर निगम की आय बढ़ेगी। रोजाना 1 करोड़ रुपये लीटर पानी भी यहां का सप्लाई हुआ तो 6 रुपये प्रति एक हजार लीटर की दर के हिसाब से 60 हजार रुपये दिन बनेगा। यानी 18 लाख रुपए प्रतिमाह और 2.16 करोड़ रुपए तक सालाना की आय होगी। इसके अलावा मांग बढ़ने पर यह राशि और भी बढ़ती जाएगी। ऐसे में आत्मनिर्भर निगम बनने का रास्ता मिलेगा।

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