भोपाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश पुलिस को नक्सलवाद के खिलाफ अपने लंबे और रणनीतिक अभियान में आज एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। मध्यप्रदेश में सक्रिय आखिरी रजिस्टर्ड नक्सली दीपक ने बालाघाट में पुलिस के सामने 11 दिसम्बर को आत्मसमर्पण कर दिया है। दीपक लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था और उसके सरेंडर को नक्सल उन्मूलन अभियान की निर्णायक उपलब्धि माना जा रहा है।
मध्यप्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने लगातार दबाव बनाए रखा था। सर्च ऑपरेशन, इंटेलिजेंस मॉनिटरिंग और जमीनी नेटवर्क के कारण नक्सली गतिविधियाँ लगातार कमजोर पड़ीं। इसका परिणाम यह हुआ कि प्रदेश में रजिस्टर्ड नक्सलियों की संख्या तेजी से घटने लगी। इससे पहले 21 नक्सली मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में आत्मसमर्पण कर चुके थे, जिनमें कई मोस्ट वांटेड और इनाम घोषित नक्सली भी शामिल थे।
दीपक के सरेंडर के साथ अब मध्यप्रदेश पूरी तरह रजिस्टर्ड नक्सलियों से मुक्त हो गया है। यह स्थिति प्रदेश के लिए सुरक्षा, निवेश और विकास के लिहाज से बहुत बड़ा संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह न सिर्फ पुलिस की सामरिक सफलता है, बल्कि नक्सल विचारधारा के कमजोर पड़ने का भी प्रतीक है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरेंडर करने वालों को पुनर्वास योजनाओं और मुख्य धारा में लौटने के अवसर को ध्यान में रखते हुए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दीपक का सरेंडर प्रदेश में नक्सली नेटवर्क के लगभग अंत का प्रमाण है।
नक्सलवाद मुक्त मध्यप्रदेश का यह अध्याय सुरक्षा एजेंसियों और जनता—दोनों के लिए राहत और उम्मीद की बड़ी खबर है।


