लोकेशन/रीवा/अरविन्द तिवारी/ख़बर डिजिटल/ रीवा जिले के जनपद पंचायत त्योथर अंतर्गत ग्राम पंचायत मझिगवां में इन दिनों एक फर्जी खानदानी सचरा बनाकर जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित करने का मामला सामने आया है, जोकि काम के लिए बाहर गए हुए थे, जिसके चलते वो इस काम के लिए आपत्ति नहीं ले पाए थे। जबकि सारे मामले में रिश्तेदार की तरफ से ही करतूत करने की बात सामने आ रही है।
पीड़ितों ने बताई जानकारी
मझिगवां पंचायत के मछेहिया टोला निवासी महेन्द्र पाल व अमरनाथ पिता स्व. रामसहाय पाल ने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद दोनों भाई बीस वर्ष पूर्व काम धंधे की तलाश में राजस्थान चले गए थे, और वहीं पर मेहनत मजदूरी करने लगे। जिसकी वजह से हमें साल दो साल में घर वापस आने का मौका मिलता है, इसी बात का फायदा उठाकर हमारे भांजे अर्जुन प्रसाद व शेर बहादुर पाल पिता रामयज्ञ पाल ने ग्राम पंचायत मझिगवां त्योथर की सरपंच कलावती दीपांकर से मिलीभगत कर कूटरचित तरीके से हमारी मां का नाम दुइजी देवी से बदल कर फुलझारा देवी पाल अंकित करवा दिया, साथ ही दोनों भाईयों अमर नाथ एवं महेंद्र पाल को मृत घोषित कर 24 मई 25 को फर्जी सचरा खानदान बनवाकर अपने आपको नाना की संपत्ति का वारिस घोषित कर दिया। हमारे भांजों ने हम दोनों को मृत घोषित कर ग्राम पंचायत मझिगवां के मछेहिया टोले में स्थित भूमि खसरा नं. 436/3 रकवा 0.032 को अनावेदक गोविंद प्रसाद पिता छोटे लाल पाल के हाथों बेच कर रजिस्ट्री करवा दी। राजस्थान से छुट्टी पर घर वापस आने पर इसकी जानकारी होने पर हमारे पैरों तले से जमीन खिसक गई।
जानकारी मिलने पर सरपंच से किया संपर्क
जानकारी मिलने के बाद जब आवेदक अमरनाथ व महेंद्र पाल ने सरपंच से मिलकर संपर्क कर अपने जीवित होने की बात कही तो सरपंच ने अपने बचाव हेतु 10 अक्टूबर 25 को अपने लेटर पैड में दोनों भाईयों अमरनाथ व महेंद्र पाल को जीवित दिखाकर एवं हमारी माता का सही नाम फुलझारा देवी पाल अंकित कर दूसरा सचरा जारी कर दिया, जबकि हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 2025 के कानूनी प्रावधानों और हाल के अदालती फैसलों (जैसे बॉम्बे हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के फैसले) के अनुसार पुत्री के बच्चों (नाती-नातिन) को अपने नाना की पैतृक संपत्ति में सीधे जन्मसिद्ध अधिकार नहीं मिलता, हालांकि एसटी ने महिलाओं के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अधिकार दिए हैं, किंतु सामान्यतः यह अधिकार मां के माध्यम से अप्रत्यक्ष होता है और यह पिता की ‘स्वयं अर्जित’ संपत्ति पर लागू नहीं होता। अतः पीड़ित पक्ष ने समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के माध्यम से एसडीएम त्योंथर को लिखित आवेदन पत्र देकर इस मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए फर्जी सचरा खानदान लगाकर कराई गई भूमि की रजिस्ट्री को रद्द कर फर्जी सचरा खानदान बनाने वाले सरपंच के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।


