जयपुर, 10 दिसम्बर 2025: वेदांता समूह के चेयरमैन और जाने-माने इंडस्ट्रलिस्ट अनिल अग्रवाल को जयपुर में आयोजित पहले प्रवासी राजस्थानी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा “प्रवासी राजस्थानी सम्मान” से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर अनिल अग्रवाल ने बड़ी घोषणा की कि वेदांता समूह राजस्थान में अपने उत्पादन को ₹1 लाख करोड़ के निवेश से दोगुना करेगा।
वेदांता समूह का बड़ा निवेश और लक्ष्य
अनिल अग्रवाल ने कहा कि विकसित भारत की राह राजस्थान से होकर गुजरेगी, क्योंकि राज्य में तेल-गैस और मिनरल्स का अपार भंडार है।
- निवेश की राशि: ₹1 लाख करोड़ (जिंक, सीसा, चांदी, तेल-गैस और रिन्यूएबल ऊर्जा में)।
- उत्पादन लक्ष्य: इन क्षेत्रों में उत्पादन को दोगुना करना।
- वर्तमान योगदान: वेदांता समूह अब तक राजस्थान में ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक का निवेश कर चुका है और पिछले दशक में राष्ट्रीय एवं राज्य कोष में लगभग ₹3 लाख करोड़ का योगदान दिया है।
नए उद्योग और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
अनिल अग्रवाल ने राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए दो प्रमुख परियोजनाओं की घोषणा की:
- ज़िंक इंटरनेशनल इंडस्ट्रियल पार्क (ज़िंक पार्क):
- इसका उद्देश्य छोटे और मध्यम जिंक उत्पादक उद्योगों (MSME और डाउनस्ट्रीम सेक्टर) को मजबूत करना है।
- इस पार्क में 200 नई इंडस्ट्री स्थापित करने की क्षमता होगी और बिजली, पानी, रॉ मैटेरियल और इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
- फॉस्फेट उर्वरक प्लांट:
- राजस्थान एवं उत्तर भारत का पहला फॉस्फेट उर्वरक प्लांट वेदांता समूह द्वारा लगाया जा रहा है।
- यह परियोजना “ग्रीन राजस्थान” बनाने और उर्वरकों के आयात में बड़ी कटौती करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सामाजिक और रोजगार में योगदान
- रोजगार: लाखों रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं को नौकरी लेने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनने का आह्वान किया।
- शिक्षा और महिला सशक्तिकरण:
- वेदांता 25,000 नंदघर स्थापित कर रहा है (महिला एवं बाल पोषण-शिक्षा)।
- वेदांता गर्ल्स पीजी कॉलेज, रींगस ने 50,000 से अधिक छात्राओं को शिक्षित किया है।
- दरीबा माइंस में लड़कियाँ भूमिगत स्तर पर कार्य कर रही हैं और उत्पादन में 30% तक वृद्धि कर रही हैं। महिला-नेतृत्व वाली रेस्क्यू टीम पूरे भारत में मॉडल बन रही है।
- चांदी उत्पादन: हिंदुस्तान जिंक के अधिग्रहण के बाद उत्पादन में 10 गुना वृद्धि की गई और आज भारत चांदी का आयातक नहीं, बल्कि उत्पादक बनने की स्थिति में है।
अनिल अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान की मिट्टी में 40 से अधिक प्रकार के विश्वस्तरीय पत्थर मौजूद हैं और राज्य तेल-गैस, मिनरल्स और रिन्यूएबल ऊर्जा की प्रचुर उपलब्धता के कारण भविष्य की ऊर्जा राजधानी बन सकता है।


