नई दिल्ली : भारतीय कृषि जगत के दिग्गज ब्रांड ‘सोनालीका ट्रैक्टर्स’ ने किसानों के साथ अपनी साझेदारी के 30 सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं। पंजाब के एक छोटे से शहर होशियारपुर से शुरू हुई यह यात्रा आज 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर के वैश्विक साम्राज्य में तब्दील हो चुकी है। यह कहानी श्री एल.डी. मित्तल के उस अटूट विश्वास की है, जिन्होंने एलआईसी से सेवानिवृत्ति के बाद ‘जीतने का दम’ की भावना के साथ एक ऐसी कंपनी की नींव रखी, जो आज फॉर्च्यून 500 इंडिया की सूची में शामिल है। वर्तमान में सोनालीका भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रैक्टर निर्माता और वैश्विक स्तर पर पाँचवाँ सबसे बड़ा ब्रांड बन चुका है।
सोनालीका की विरासत ‘किसान-प्रथम’ की विचारधारा पर टिकी है। जहाँ अन्य कंपनियाँ केवल बाज़ार के लिए उत्पाद बनाती थीं, वहीं मित्तल परिवार (डॉ. ए.एस. मित्तल और डॉ. दीपक मित्तल के साथ) ने भारत की विविध मिट्टी और फसलों के अनुकूल कस्टमाइज्ड ट्रैक्टर विकसित किए। कंपनी की इंजीनियरिंग की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 30 साल पहले बना इनका पहला ट्रैक्टर आज भी एक ही क्रैंक में स्टार्ट हो जाता है। 2011 में वर्टिकल इंटीग्रेशन अपनाते हुए सोनालीका ने इंजन और ट्रांसमिशन का आंतरिक निर्माण शुरू किया, जिससे उन्हें महाबली (दक्षिण भारत), छत्रपति (महाराष्ट्र) और महाराजा (राजस्थान) जैसे क्षेत्र-विशिष्ट मॉडल लॉन्च करने में मदद मिली।
वैश्विक मंच पर सोनालीका का दबदबा निर्विवाद है। 2017 में होशियारपुर में विश्व के सबसे बड़े एकीकृत ट्रैक्टर प्लांट की स्थापना के बाद, कंपनी अब हर दो मिनट में एक ट्रैक्टर बनाने की क्षमता रखती है। पिछले सात वर्षों से सोनालीका भारत से ट्रैक्टर निर्यात में नंबर 1 ब्रांड बना हुआ है। आज भारत से निर्यात होने वाला हर तीसरा ट्रैक्टर सोनालीका के प्लांट में निर्मित होता है। पारदर्शिता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, कंपनी ने 2022 में वेबसाइट पर कीमतें प्रदर्शित कर उद्योग में एक नया मानक स्थापित किया। भविष्य में अपनी क्षमता को 3 लाख ट्रैक्टर प्रति वर्ष तक बढ़ाने के लक्ष्य के साथ, सोनालीका वैश्विक नेतृत्व और तकनीकी उन्नति के नए युग की ओर अग्रसर है।


