आलीराजपुर/कुलदीप खराड़ीया/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश आदिवासी बहुल प्रदेश है, इनमें दो अलग-अलग बेल्ट आते हैं, एक महाकौशल इलाके वाला, तो दूसरा निमाड़ अंचल का इलाका। इनमें सियासत के नतीजे समय-समय पर अलग ही तरह के सामने आते रहे हैं, जहां महाकौशल वाले इलाके में अन्य दल भी अपनी चमक दिखाते रहे हैं, तो निमाड़ में हमेशा से दो दलीय राजनीति का बोलबाला रहा है, हालांकि आजादी के बाद से सालों तक बस कांग्रेस ही इस इलाके का विकल्प दिखाई दी थी, लेकिन अब बीजेपी ने भी अच्छी पकड़ बनाकर चुनाव को रोचक बना दिया है। ऐसे में निमाड़ के आलीराजपुर जिले की दो विधानसभा बेहद ही खास हो जाती है, जिसके ताजा समीकरणों से आज हम आपको दो-चार कराएंगें।
आलीराजपुर सीट पर बीजेपी का कब्जा
वीओ – इस सीट के इतिहास की बात करें, तो सालों तक यहां के मतदाताओं को महज कांग्रेस का चुनाव चिन्ह पंजा ही याद रहा,साल 1980 से 2003 तक कांग्रेस ने ही इस सीट पर अपना कब्जा जमाया, और उसके पहले इमरजेंसी के बाद को छोड़कर कांग्रेस का ही इस सीट पर प्रभाव देखने को मिला। मगर साल 2023 की उमा लहर में कांग्रेस का यह किला ढह गया और बीजेपी ने फतह हासिल कर ली, इस सीट से वर्तमान में मोहन सरकार में मंत्री नागर सिंह चौहान लगातार तीन चुनाव जीते, उसके बाद साल 2018 के चुनाव में वो कांग्रेस के मुकेश पटेल से चुनाव हार गए, वहीं फिलहाल एक बार फिर नागर सिंह चौहान ने आलीराजपुर सीट पर फतह हासिल कर मोहन सरकार में मंत्री पद पाया है।
जोबट विधानसभा पर कांग्रेस का कब्जा
वीओ -मध्यप्रदेश में अगर कांग्रेस के अमेघ किले के रुप में जिस सीट को पहचाना जाता है, वो जोबट विधानसभा सीट है, यहां पर आजादी के बाद से एक आध बार छोड़कर, आज तक कांग्रेस पार्टी चुनाव जीतती आ रही है। यहां से बीजेपी के माधोसिंह महज साल 2003 की उमा लहर में जीत पाए थे। फिलहाल में इस सीट का समीकरण बड़ा ही रोचक बना हुआ है, क्योंकि यहां से आलीराजपुर के पूर्व कांग्रेस विधायक महेश पटेल की पत्नी सेना पटेल विधायक हैं। जिनके देवर मुकेश पटेल ने भी 2023 के विधानसभा चुनाव में आलीराजपुर सीट पर कांग्रेस के टिकट से अपना भाग्य आजमाया था, लेकिन उनको बीजेपी के नागर सिंह चौहान ने पटखनी दे दी थी। वहीं बात करें 2023 के चुनाव की तो बीजेपी ने विशाल रावत को टिकट दिया था, लेकिन पूर्व विधायक माधोसिंह के मैदान में उतरने से उनको मुश्किलों को सामना करना पड़ा, जोकि निर्दलीय के रुप में 21 हजार 312 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे।
आलीराजपुर में रहेगी कई मुद्दों की भरमार
वीओ – वैसे तो आदिवासी इलाकों में शुरुआत से जल, जंगल और जमीन का मुद्दा गरमाया रहा है, आदिवासियों ने विकास के साथ-साथ अस्मिता की बात पर अपने वोट का प्रयोग किया, लेकिन अब बदलती परिस्थितियों के बीच आने वाले वक्त में ये मुद्दे जिले की सियासत में अहम हो जाएंगे।
डाबड़ी क्षेत्र में चूना पत्थर अधिग्रहण पर लगाई जाए पूर्ण रोक
कंपनियों को दी गई पुलिस सुरक्षा को लिया जाए तुरंत वापस
नर्मदा के दोनों किनारों के 5-5 किमी से नहीं हटाने का करें वादा
नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति का किया जाए वादा
खाद–बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना, काला बाजारी पर हो सख्ती
आदिवासी किसानों के भूमि और वनाधिकारों की सुरक्षा की बात
भूमि अधिग्रहण में ग्राम सभा की सहमति की जाए अनिवार्य
तो इन सभी मांगों के बीच आगामी वक्त में आलीराजपुर जिले की सियासत मंडराती नजर आएगी, हालांकि माइग्रेशन भी इस क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों में शामिल है, जिस पर सामाजिक संगठन कई बार आवाज उठाते रहे हैं, ऐसे में बीजेपी का पुराना धर्मांतरण विरोधी संकल्प भी राजनीति में गूंजता नजर आ सकता है।


