मुंबई : भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हथकरघा वस्त्रों, जैसे पैठणी, चंदेरी, और मूगा सिल्क की चमक बनाए रखना अब कठिन नहीं होगा। अक्सर लोग इन नाजुक कपड़ों को खराब होने के डर से पहनने से कतराते हैं, लेकिन गोदरेज एप्लायंसेज के वॉशिंग मशीन हेड, मनीष शर्मा ने इनकी देखभाल के लिए कुछ महत्वपूर्ण और सुरक्षित तरीके साझा किए हैं। उनका मानना है कि सही धुलाई तकनीक अपनाकर इन पारंपरिक परिधानों को पीढ़ी दर पीढ़ी सुरक्षित रखा जा सकता है।
इन कपड़ों को धोने से पहले ‘केयर लेबल’ पढ़ना और उन्हें रंगों के आधार पर अलग करना अनिवार्य है। धुलाई के दौरान मशीन को क्षमता से अधिक न भरें ताकि धागों पर दबाव न पड़े। हथकरघा के लिए हमेशा 20-25 डिग्री सेल्सियस के सामान्य तापमान वाले पानी और माइल्ड डिटर्जेंट का ही उपयोग करना चाहिए, क्योंकि गर्म पानी और कठोर केमिकल प्राकृतिक रेशों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। आधुनिक मशीनों में ‘जेंटल वॉश’ या विशेष ‘हथकरघा-अनुकूल’ प्रोग्राम का चुनाव करना बुनाई की सुरक्षा के लिए सबसे बेहतर विकल्प है।
धुलाई के बाद की देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। शर्मा के अनुसार, कपड़ों को हाथ से मरोड़ने के बजाय मशीन के कम RPM वाले ‘जेंटल स्पिन साइकिल’ का उपयोग करें और उन्हें हमेशा छायादार व हवादार जगह पर ही सुखाएं। सीधी धूप रंगों को फीका कर सकती है। इन सरल तकनीकों को अपनाकर आप अपने पसंदीदा हथकरघा वस्त्रों को केवल अलमारी की शोभा बनाने के बजाय गर्व के साथ बार-बार पहन सकते हैं।


