शैलेश नामदेव/ खबर डिजिटल/ डिंडोरी। जिले के वनांचलों में एक बार फिर जंगली हाथियों की उपस्थिति ने प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। अनूपपुर की सीमा से लगे जंगलों के रास्ते तीन नर हाथियों का एक दल डिंडोरी की सीमा में दाखिल हुआ है। हालांकि वर्तमान में इन हाथियों का व्यवहार शांत बताया जा रहा है, लेकिन वन विभाग ने सुरक्षा की दृष्टि से पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया है।
90 दिनों का सफर और ओडिशा से आमद
यह हाथियों का झुंड मूलतः ओडिशा के जंगलों से आया है, जो पिछले तीन महीनों से शहडोल और अनूपपुर के इलाकों में विचरण कर रहा था। रविवार दोपहर जोहिला नदी पार कर इस दल ने डिंडोरी के रामगुढ़ा और सारसताल जंगलों में प्रवेश किया। सोमवार तक यह दल लगभग 50 किलोमीटर का सफर तय कर बसनिया कक्ष क्रमांक 239 तक पहुंच चुका है।
फसलों का नुकसान और मुआवजे की पहल
हाथियों के इस मूवमेंट के दौरान कुई क्षेत्र में दो किसानों की गेहूं की खड़ी फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए क्षति का आकलन शुरू कर दिया है ताकि प्रभावित किसानों को जल्द उचित मुआवजा मिल सके। राहत की बात यह है कि हाथियों ने अभी तक रिहायशी बस्तियों या मानवीय आबादी में प्रवेश नहीं किया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और निगरानी
रेंजर अतुल सिंह के नेतृत्व में मुड़की, डिंडोरी, नेवसा और सारसताल सर्किल का वन अमला तैनात किया गया है। स्थानीय हाथी मित्र दलों की सहायता से हाथियों की हर हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है। उप वन मंडल अधिकारी एस.के. जाटव ने बताया कि महुआ और तेंदूपत्ता बीनने का सीजन होने के कारण ग्रामीणों को जंगल न जाने की सख्त चेतावनी दी गई है।
अतीत की घटनाओं से बढ़ी सतर्कता
डिंडोरी अब हाथियों के लिए एक प्राकृतिक गलियारे के रूप में उभर रहा है, लेकिन यहां पहले भी जान-माल का नुकसान हो चुका है। साल 2022 में पंडरीपानी और बासीदेवरी गांवों में हाथियों के हमले से दो लोगों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के करीब न जाएं और रात के समय अकेले बाहर न निकलें।


