सब-हेडलाइन:–अक्षय तृतीया से पहले कड़ी निगरानी, दोषियों को 2 साल की जेल और 1 लाख तक जुर्माना
सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता कटनी, 16 अप्रैल–जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सजग और मुस्तैद नजर आ रहा है। आगामी अक्षय तृतीया और अन्य विवाह मुहूर्तों को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक और बहुस्तरीय कार्ययोजना तैयार की है।कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर विकासखंड स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय बाल विवाह रोकथाम दल का गठन किया गया है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी रखेंगे। साथ ही निगरानी समितियों और कोर ग्रुप को भी सक्रिय कर दिया गया है।कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जिसका समाज पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि इस कुप्रथा को खत्म करने में प्रशासन का सहयोग करें और कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलने पर तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम, संबंधित एसडीएम या महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचित करें।प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 2006 की धाराओं 9, 10, 11 और 13 के तहत बाल विवाह कराने या उसमें सहयोग देने वाले व्यक्ति, संस्था या संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को दो वर्ष तक का कारावास, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड भुगतने पड़ सकते हैं।महिला एवं बाल विकास विभाग ने हलवाई, कैटरर्स, बैंड-बाजा संचालक, घोड़ी वाले, धर्मगुरु और ट्रांसपोर्टरों से भी अपील की है कि वे बाल विवाह में किसी भी प्रकार की सेवा प्रदान न करें, अन्यथा उन्हें भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।ऑनलाइन शिकायत की सुविधा भी उपलब्धबाल विवाह की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार द्वारा “बाल विवाह मुक्त भारत” पोर्टल शुरू किया गया है, जहां आम नागरिक ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 181, 1098 और 100 पर भी सूचना दी जा सकती है।प्रशासन ने दोहराया है कि बाल विवाह के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है और किसी भी हालत में इस कुप्रथा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


